Padmini Ekadashi 2026 : अधिकमास या पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी का नाम ‘पद्मिनी एकादशी’ है। इस एकादशी का नाम पद्मिनी होने के पीछे एक त्रेत्रा युग की पौराणिक कथा है। त्रेतायुग में हैहय वंश के राजा कीर्तिवीर्य की पत्नी रानी पद्मिनी ने सबसे पहले इस कठिन व्रत का पालन किया था, जिसके कारण भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर इस तिथि को उन्हीं का नाम दे दिया।
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त्रेतायुग युग की पौराणिक कथा
महिष्मती पुरी के राजा कीर्तिवीर्य की कई रानियां थीं, लेकिन किसी से भी उन्हें संतान सुख नहीं मिला। संतान न होने के कारण दुखी राजा अपनी प्रिय रानी पद्मिनी के साथ राजपाठ छोड़कर गंधमादन पर्वत पर संतान प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या करने चले गए। कई वर्षों तक तपस्या करने के बाद भी जब उन्हें सफलता नहीं मिली, तो रानी पद्मिनी ने अनुसूया माता से उपाय पूछा।
रानी को पुत्र प्राप्ति का वरदान
तब सती अनुसूया ने रानी पद्मिनी को बताया कि मलमास (अधिकमास) में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी बेहद चमत्कारी और फलदायी होती है। उन्होंने रानी को इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत करने की सलाह दी। रानी पद्मिनी ने भगवान विष्णु की कठोर आराधना की और तब भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और रानी को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। भगवान विष्णु ने राजा कीर्तिवीर्य को एक ऐसे पुत्र का वरदान दिया जो तीनों लोकों में सर्वश्रेष्ठ हो, सर्वगुण संपन्न हो और जिसे देवताओं के अलावा कोई अन्य पराजित न कर सके।
पद्मिनी एकादशी तिथि
पद्मिनी एकादशी तिथि की शुरुआत 26 मई को सुबह 5 बजकर 10 मिनट से होगी और इसका समापन 27 मई को सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार वर्ष 2026 में यह व्रत 27 मई को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 28 मई की सुबह किया जाएगा।