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शासन की बेरुखी से कैंसर संस्थान के 12 विभागों पर लगा ताला, फैकल्टी के 88 पद हैं खाली, इलाज में छाया संकट

कल्याण सिंह सुपर स्पेशिएलिटी कैंसर संस्थान (Kalyan Singh Super Speciality Cancer Institute) में लगातार डॉक्टरों के इस्तीफों ने प्रशासन की मुसीबत बढ़ गई है। इससे प्रतिदिन कैंसर संस्थान (Cancer Institute) में करीब 300 बेड पर मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। 24 घंटे इमरजेंसी संचालित की जा रही है। ओपीडी में 400 से अधिक नए-पुराने मरीज आ रहे हैं।

By santosh singh 
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लखनऊ : कल्याण सिंह सुपर स्पेशिएलिटी कैंसर संस्थान (Kalyan Singh Super Speciality Cancer Institute) में लगातार डॉक्टरों के इस्तीफों ने प्रशासन की मुसीबत बढ़ गई है। इससे प्रतिदिन कैंसर संस्थान (Cancer Institute) में करीब 300 बेड पर मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। 24 घंटे इमरजेंसी संचालित की जा रही है। ओपीडी में 400 से अधिक नए-पुराने मरीज आ रहे हैं। इन मरीजों के इलाज व देखभाल का जिम्मा संस्थान के 33 नियमित, एक प्रतिनियुक्त पर तैनात डॉक्टरों पर हैं। साथ ही आठ डॉक्टर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय (General of Medical Education) की तरफ से बांड के तहत तैनात किए गए हैं। 70 से ज्यादा नर्स, पैरामेडिकल व अन्य श्रेणी के कर्मचारी नौकरी छोड़कर जा चुके हैं।

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अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों के लगातार इस्तीफों की सबसे बड़ी वजह यहां मिलने वाला वेतन है। डॉक्टरों का कहना है कि दूसरे सरकारी और स्वायत्त चिकित्सा संस्थानों की तुलना में यहां वेतन काफी कम है। यही वजह है कि विशेषज्ञ डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर संस्थान छोड़ रहे हैं। यदि जल्द ही वेतन और सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में और डॉक्टरों के इस्तीफे हो सकते हैं। इसका सीधा असर मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ेगा। कई विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और बढ़ सकती है। जिससे इलाज के साथ संस्थान की शैक्षणिक और शोध गतिविधियां भी प्रभावित होने की आशंका है।

संस्थान के साइकेट्री विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रफेसर डॉ. अभिनव तिवारी ने एक महीने के नोटिस के साथ इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद संस्थान का साइकेट्री विभाग भी बंद होने के कगार पर आ गया है। इसी के साथ संस्थान में बिना डॉक्टर वाले विभागों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। डॉ. अभिनव ने सितंबर, 2025 में संस्थान जॉइन किया था। लगातार हो रहे इस्तीफों से संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक डॉ. अभिनव के इस्तीफे की वजह वेतन और भत्ते काफी कम मिलना है। लंबे समय से वेतन वेतन विसंगति दूर करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। इससे पहले जून में न्यूरो के नियमित डॉक्टर डॉ. मयंक सिंह ने SGPGI में न्यूरो सर्जरी विभाग चयन होने के बाद इस्तीफा दे दिया था।

इन विभागों में डॉक्टर नहीं

मेडिकल ऑन्कॉलजी, मेडिकल फिजिक्स, डेंटिस्ट्री, न्यूक्लियर मेडिसिन, बायोकेमिस्ट्री, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, पैलिएटिव केयर, पीएमआर, त्वचा रोग, हीमैटॉलजी और रेडियोडायग्नोसिस विभाग पहले से बिना डॉक्टर के है। अब साइकेट्री भी इस सूची में शामिल है।

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28 डॉक्टर छोड़ चुके हैं संस्थान

पिछले कुछ वर्षों मे 28 से अधिक डॉक्टर संस्थान छोड़ चुके है। इनमे न्यूक्लियर मेडिसिन की डॉ. सोनम सुमन, ओरल ऐड मैक्सिलोफेशल सर्जरी के डॉ. गौरव सिंह, मेडिकल ऑन्कॉलजी की डॉ. ईशा जफा, क्रिटिकल केयर के डॉ. साई सरन, ईएनटी की डॉ. इंदु शुक्ला, ऑन्को एनेस्थिसिया के डॉ. सौरभ विज और डॉ. स्वाति, एनेस्थिसिया के डॉ. तन्मय घटक और डॉ. तापस सिंह, प्लास्टिक सर्जरी के डॉ. बृजेश मिश्रा, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के डॉ. सत्य प्रकाश, सर्जरी के डॉ. एचएस पाहवा, गायनी की डॉ. वंदना और डॉ. पारुल शामिल है।

फैकल्टी का बुरा हाल

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरुण विजय (Medical Superintendent Dr. Varun Vijay) ने बताया कि 121 नियमित स्वीकृत हैं। फैकल्टी पद 33 परमानेंट कार्यरत हैं, जबकि 88 फैकल्टी पद खाली हैं और 9 डॉक्टर संस्थान के डेप्युटेशन पर हैं।

 

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