नई दिल्ली। गेहूं की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी के कारण पाकिस्तान के दक्षिण पंजाब (South Punjab of Pakistan) में आटे की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। इस कारण आम नागरिकों के लिए आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। सरकार द्वारा सब्सिडी वाला आटा स्थानीय बाजारों से लगभग गायब हो गया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार रहीम यार खान में स्थिति और भी जटिल है, जहां परिवार रोज़ाना कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं। बाजार के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि खुले बाजार में गेहूं की कीमतें 40 किलो के लिए पाकिस्तानी रुपये 4,500 से PKR 4,600 के बीच पहुंच गई हैं। इस बढ़ोतरी के कारण आटा मिल मालिकों को खुदरा कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। इस कारण आटा लगभग 130 प्रति किलो पीकेआर हो गया है।
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आधिकारिक रूप से तय कीमतें लाहौर के बाहर शायद ही कहीं देखने को मिलती हैं, जिससे दक्षिण पंजाब का अधिकांश हिस्सा निजी सप्लायरों के भरोसे है। इन जिलों में उपभोक्ताओं को तेजी से महंगा ब्रांडेड आटा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जो कई परिवारों की पहुंच से बाहर है। पाकिस्तान फ्लोर मिल्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने इस संकट का कारण व्यापारियों और जनता के पास गेहूं के स्टॉक में कमी को बताया है, जिससे बड़े पैमाने पर आपूर्ति में कमी आई है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार पांच मिलियन आबादी वाले रहीम यार खान में मिलों को सरकार द्वारा आवंटित गेहूं का हिस्सा नहीं मिल रहा है, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन और बढ़ रहा है। एसोसिएशन का यह भी दावा है कि पिछले दो सालों से लगभग 80 प्रतिशत आटा मिलें बढ़ते परिचालन लागत और जिसे वे एक असमान वितरण प्रणाली के कारण घाटे में चल रही हैं। मिल मालिकों ने पंजाब सरकार से 20 जनवरी से 20 मार्च के बीच अपने लगभग 1.5 मिलियन टन के भंडार से प्रतिदिन 20,000 से 22,000 टन गेहूं जारी करने का आग्रह किया है। इससे बाजार को स्थिर किया जा सके। उन्होंने मरियम नवाज (Maryam Nawaz) से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, बेकर्स शिकायत करते हैं कि सरकारी आटा अभी भी कम मात्रा में और घटिया गुणवत्ता का है, जिससे जनता में निराशा बढ़ रही है।