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ईरान पर अमेरिकी हमले को लेकर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, पड़ोसी ने गिरगिट की तरह बदला रंग

By Abhimanyu 
Updated Date

Pakistan condemns US attack on Iran: अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किए जाने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। हमले से गुस्साए ईरान ने इजरायल पर ताबड़-तोड़ मिसाइलें दागीं हैं। इस बीच पाकिस्तान का दोहरा चरित्र भी सबके सामने आ चुका है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार देने की वकालत करने वाला पाकिस्तान अब ईरान पर हुए हमले की निंदा कर रहा है।

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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका के हमले को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान की संप्रभुता पर किया गया यह हमला क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। बयान में आगे कहा गया कि ये हमले पहले से ही जारी इजरायली कार्रवाईयों का ही हिस्सा हैं और इससे क्षेत्र में तनाव और हिंसा और अधिक बढ़ सकती है।

पाकिस्तान का मानना है कि अमेरिका की कार्रवाई के बाद जो स्थिति बनती दिख रही है, वह न सिर्फ मध्य-पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की शांति और स्थिरता के लिए ख़तरनाक है। पड़ोसी मुल्क ने कहा कि इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सभी नियमों का उल्लंघन किया है। ईरान को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और उस पर इस तरह के हमले करना किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता।

पाकिस्तान ने सभी देशों से आम नागरिकों की जान और संपत्ति का सम्मान करने और युद्ध जैसी कार्रवाईयों को तुरंत रोकने की अपील की है। साथ ही उसने सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून, खासतौर पर मानवाधिकार कानून का पालन करने की सलाह दी है। उसने इस बात पर ज़ोर दिया कि मौजूदा संकट का हल केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।

बता दें कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच किया था। जिसके बाद ट्रंप की चापलूसी करते हुए मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबल शांति पुरस्कार देने की अपील की थी। लेकिन, ट्रंप का रवैया एक भीषण युद्ध की संभावनाओं को जन्म दे रहा है। एक्सपर्ट्स की मानें तो ट्रंप-मुनीर के बीच कई बड़े समझौते हुए हैं। जिसके तहत अगर युद्ध आगे बढ़ता है तो अमेरिका, ईरान के खिलाफ हमले के लिए पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर सकता है। पाकिस्तान और ईरान 900 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं।

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