Parthiv Shivling in Sawan : शिव भक्ति के विशेष माह में महादेव की पूजा में शिवलिंग का खास महत्व है। मान्यता कि शिवलिंग भगवान शिव का सबसे प्राचीन प्रतीक है। जहाँ आप साकार से निराकार की और बढ़ते हैं। यह ब्रह्मांड और ब्रह्मांड के प्रतिनिधित्व का प्रतीक है। शिवलिंग का अर्थ केवल शिव का होना ही नहीं है अपितु यह मौन रूप से प्रकट होने वाली और सदा गतिमान रहने वाली उस परम चेतना का भी प्रतीक है। इसी प्रकार पार्थिव शिवलिंग का अर्थ होता है मिट्टी से बना शिवलिंग, जिसे विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठानों, व्रतों या श्रावण मास जैसे पवित्र समय में पूजा के लिए तैयार किया जाता है।
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गंगाजल मिलाकर बनाएं पार्थिव शिवलिंग
मिट्टी के शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए, पवित्र नदी या तालाब की मिट्टी का उपयोग करना सबसे अच्छा माना जाता है। यदि यह उपलब्ध नहीं है, तो आप अपने घर के बगीचे या किसी साफ स्थान से भी मिट्टी ले सकते हैं। मिट्टी का शिवलिंग गाय के गोबर, गुड़, मक्खन, भस्म, मिट्टी और गंगा जल मिलाकर बनाया जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाते समय इन सभी चीजों को एक में मिला दें और फिर गंगाजल मिलाकर बनाएं। ध्यान रहे मिट्टी का शिवलिंग बनाते समय पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल करें।
दिशा
सब से पहले जिस भी पात्र में आप शिवलिंग बना रहे हैं उस पात्र के नीचे तीन पत्तों वाला बेल पत्री रखें। बेल पत्री की डंडी याद से उत्तर दिशा में ही रखें और और खुद पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठे।
शिवलिंग का आकार
शिवलिंग बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि इतना हो कि आप उसे आसानी से स्थापित कर सकें और पूजा के बाद विसर्जित कर सकें।
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शिव परिवार
शिवलिंग के साथ-साथ, आप मां पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी और नंदी जी की छोटी प्रतिमाएं भी मिट्टी से बना सकते हैं।
मंत्र जप
शिवलिंग बनाते समय शिव मंत्रों का जाप कर सकते हैं।