नई दिल्ली। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना (CJI Sanjiv khanna) की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को तमिलनाडु (Tamilnadu) के गवर्नर आर एन रवि (Governor R N Ravi) को तुरंत वापस बुलाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका खारिज करते समय चीफ जस्टिस ने कहा कि वह संविधान से बंधे हुए हैं और याचिका खारिज कर रहे हैं क्योंकि उसमें उन्हें तथ्यात्मक गलतियां दिखती हैं।
पढ़ें :- चौंका रही है चांदी की चाल, एक दिन में 10 हजार बढ़े दाम, 1 महीने में 1 लाख रुपये अधिक बढ़ा रेट
याचिकाकर्ता ने व्यक्तिगत रूप से दायर अर्जी में आरोप लगाया था कि गवर्नर रवि ने तमिलनाडु के लोगों का अपमान किया है क्योंकि उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा में वह अपना पारंपरिक अभिभाषण पढ़े बिना ही बाहर चले गए थे। इसी को आधार बनाकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से भारत के राष्ट्रपति के सचिव और अन्य को गवर्नर आरएन रवि (Governor R N Ravi) को तुरंत वापस बुलाने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल 6 जनवरी को विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही बाहर चले गए थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि हम भी संविधान से बंधे हैं। हम ऐसी प्रार्थनाएं स्वीकार नहीं कर सकते। याचिका खारिज की जाती है। प्रार्थनाएं गलत तरीके से बनाई गई हैं।
बता दें कि पिछले महीने 6 जनवरी को तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल द्रमुक मुनेत्र कषगम (DMK) पर संविधान और राष्ट्रगान का ‘अनादर’ करने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल आर एन रवि (Governor R N Ravi) अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही विधानसभा से चले गए थे। गवर्नर के इस कृत्य की मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन (Chief Minister M.K. Stalin) ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘बचकाना हरकत’ बताया था और उन पर लगातार राज्य के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया था।
सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) ने राज्य गान (माता तमिल का आह्वान) और राज्य का ‘लगातार अपमान’ करने के लिए रवि के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन भी किया था। तब इस मामले में राजभवन और सत्तारूढ़ दल के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई थी। हालांकि, गवर्नर रवि ने कहा था कि उन्होंने हमेशा राज्य गान ‘तमिल थाई वझथु’ की गरिमा को बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि वह ‘हर समारोह में इसे पूरी निष्ठा के साथ गाते हैं।