Akhilesh Yadav vs. Jayant Chaudhary : सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ बनाने वाले बयान को लेकर यूपी की सियासत गरमाने लगी है। इस मामले में आरएलडी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने पलटवार करते हुए इसे सीधे जाट समाज के अपमान से जोड़ दिया है। वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इसको लेकर अखिलेश पर जोरदार हमला बोला है। मौर्य और मायावती ने अखिलेश से इस टिप्पणी के लिए जयंत चौधरी से माफी मांगने की मांग की है।
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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘नेताजी की कमाई, सपा बहादुर ने गंवाई। यह सोलह आने सच है। लेकिन इस छटपटाहट ने सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव का मनोबल ऐसा तोड़ा है कि अपनी ज़ुबान से अगड़ा, पिछड़ा और दलितों में किसी पर भी अपनी लाठी चला देते हैं। अब केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी जी पर घटिया बयान देकर अपनी उसी छटपटाहट को उजागर कर दिया जबकि ‘भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह जी का सैफई परिवार पर इतना क़र्ज़ है कि सपा बहादुर उसे चुका नहीं सकते। सपा बहादुर को श्री जयंत चौधरी जी से तुरंत माफ़ी मांगनी चाहिए। उनकी छटपटाहट इसमें भी है कि अगड़ा-पिछड़ा-दलित की ‘त्रिवेणी’ भाजपा के साथ है। इसमें कोई शक नहीं है कि उत्तर प्रदेश की जनता जातिवाद व मुस्लिम तुष्टीकरण में डूबी सपा का बोरिया-बिस्तर समेटकर 2027 में उसे सैफई भेज देगी।’
नेताजी की कमाई, सपा बहादुर ने गंवाई। यह सोलह आने सच है। लेकिन इस छटपटाहट ने सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव का मनोबल ऐसा तोड़ा है कि अपनी ज़ुबान से अगड़ा, पिछड़ा और दलितों में किसी पर भी अपनी लाठी चला देते हैं।
अब केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी जी पर घटिया बयान देकर अपनी उसी…
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) August 22, 2026
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने लिखा, ‘1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा। 2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।’
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस…
— Mayawati (@Mayawati) August 22, 2026
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यूपी की पूर्व सीएम ने आगे लिखा, ‘3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ। और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है। 4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।’
मायावती ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, ‘5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं। 6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।’
क्या है पूरा विवाद?
बीते दिनों यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी रहे दलों पर बिना नाम लिए निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा अपने सहयोगी दलों को आगे बढ़ाने का काम किया, इसके बावजूद कुछ लोग उनका साथ छोड़कर चले गए। अखिलेश ने कहा, ‘कहां-कहां से आ गए थे, हमने चवन्नी का रुपया बना दिया, तब भी लोग छोड़कर चले गए।’ इस टिप्पणी को जयंत चौधरी के पुराने बयान से जोड़कर देखा गया, जब वो सपा के साथ में थे। चौधरी ने एक जनसभा में बीजेपी में जाने की चर्चाओं का जवाब देते हुए कहा था कि वो चवन्नी नहीं है जो पलट जाएं।
इस टिप्पणी पर जयंत चौधरी ने पलटवार करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, ‘सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते, कोई बात नहीं थी… जाट समाज को टारगेट करना और कहना ABCD हमने सिखाई? मैं इस अहंकार को देख चुका हूँ करीब से और मानता हूँ ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है!’
सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते,
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जाट समाज को टारगेट करना और कहना ABCD हमने सिखाई?
मैं इस अहंकार को देख चुका हूँ करीब से और मानता हूँ ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है!
— Jayant Singh (@jayantrld) August 21, 2026