नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि शिक्षा बचाएं, भविष्य बचाएं ,जवाबदेही और निष्पक्षता की मांग करने वाला छात्रों का देशव्यापी आंदोलन ‘छात्रों की गूंज’ यह आपकी शिक्षा है, आपका भविष्य है, आपकी लड़ाई है। राहुल गांधी ने कहा कि मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं आपके लिए लड़ूंगा और आपके सपनों को पूरा करने में आपकी मदद करूंगा। मैं आपकी बात सुनना चाहता हूं। हमें अपने विचार बताइए।
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अगर आपने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, या महँगी fees का दर्द झेला है
अगर इस व्यवस्था ने आपके सपने तोड़े हैं
अगर आपके परिवार ने आपकी पढ़ाई के लिए जीवनभर की कमाई लगा दी है
तो सुनिए: ‘छात्रों की गूंज’ आपकी आवाज़ है।
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यह सिर्फ़ एक अभियान नहीं, यह आपकी मांग को सरकार तक पहुँचाने…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 18, 2026
उन्होंने कहा कि जब शिक्षा एक बाज़ार बन जाती है, तब सिर्फ़ अमीर ही पढ़-लिख सकते हैं। सरकार ने चुपचाप अपनी ज़िम्मेदारी और आपका भविष्य ऐसी प्राइवेट कंपनियों के हाथों में सौंप दिया है जो मकसद के बजाय मुनाफे के लिए काम करती हैं। भारत की शिक्षा संस्थाओं में वरिष्ठ पदों पर राजनीतिक नियुक्तियाँ की जा रही हैं। पाठ्यक्रम शिक्षा के लिए नहीं, बल्कि विचारधारा थोपने के लिए बदले जा रहे हैं। इतिहास को मिटाया जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण को कमजोर किया जा रहा है। और इसकी कीमत छात्र चुका रहे हैं।
मोदी सरकार में भारत का शिक्षा बजट लगातार कम हुआ है, आज बजट का केवल 2.4% हिस्सा ही शिक्षा के लिए आवंटित किया जाता है। भारत के शिक्षा बजट के बराबर लगभग 22 लाख NEET अभ्यर्थी तैयारी और परीक्षा पर अनुमानित 1.36 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो भारत के वार्षिक केंद्रीय शिक्षा बजट के लगभग बराबर है। भारत में लगभग हर घंटे एक सरकारी स्कूल बंद हो रहा है , क्योंकि प्राइवेट स्कूल बढ़ रहे हैं और सरकारी शिक्षा खत्म हो रही है।
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केवल 12 ही स्नातक पाते हैं नौकरी
राहुल गांधी ने कहा कि हर 1,000 छात्रों में से, जो शिक्षा व्यवस्था में प्रवेश करते हैं, केवल 12 ही स्नातक होने के बाद एक स्थायी नौकरी प्राप्त कर पाते हैं। जब एक ही प्राधिकरण हर परीक्षा, हर सीट और हर परिणाम को नियंत्रित करे और किसी के प्रति जवाबदेह न हो तब व्यवस्था सिर्फ छात्रों को विफल नहीं करती, उन्हें कुचल देती है।
उन्होंने कहा कि अगर आपने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, या महंगी फीस का दर्द झेला है। अगर इस व्यवस्था ने आपके सपने तोड़े हैं। अगर आपके परिवार ने आपकी पढ़ाई के लिए जीवनभर की कमाई लगा दी है। तो सुनिए: ‘छात्रों की गूंज’ आपकी आवाज़ है। यह सिर्फ़ एक अभियान नहीं, यह आपकी मांग को सरकार तक पहुंचाने का ज़रिया है। सस्ती शिक्षा। निष्पक्ष परीक्षा। सम्मानजनक रोज़गार। और इसमें जुड़ना सिर्फ़ 30 सेकंड का काम है: आपका एक हस्ताक्षर इस लड़ाई को ताक़त देगा। जितने ज़्यादा नाम, उतनी बुलंद गूंज।