नई दिल्ली। ब्रिटिश वैज्ञानिक डॉ. इयान पीअरसन (British scientist Dr. Ian Pearson) ने साल 2016 में एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की थी। उन्होंने दावा किया था कि 2025 तक दुनिया के कई पुरुष और महिलाएं आत्मीयता और रिश्तों के लिए AI जनरेटेड रोबोट का इस्तेमाल करेंगे। उस समय इस बयान पर खूब बवाल मचा था। आलोचकों ने कहा था कि इंसानी रिश्ते भावनाओं पर टिके होते हैं, तकनीक उन्हें कभी रिप्लेस नहीं कर सकती, लेकिन वक्त बीता और विज्ञान-तकनीक ने तेजी से तरक्की की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स ने सिर्फ मशीन बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इंसानी रिश्तों को भी नया रूप देने में कामयाबी हासिल की।
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अब अमेरिकी कंपनी REALBOTIX ने ऐसे रोबोट तैयार कर दिए हैं जो न सिर्फ यौन सुख प्रदान कर सकते हैं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी बना सकते हैं।
क्या है इन रोबोट्स की कीमत?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने तीन खास AI रोबोट लॉन्च किए हैं, जिनके नाम Aria, Harmony और Melody हैं। Harmony को खासतौर पर सेक्स प्लेजर के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी कीमत 20,000 डॉलर है, जो भारतीय रुपये में करीब 17 लाख 20 हजार होती है। वहीं Melody को इंसानी भावनाओं को समझने और रिलेशनशिप का अहसास कराने के लिए बनाया गया है। इसकी कीमत 1,75,000 डॉलर यानी लगभग 1 करोड़ 50 लाख 50 हजार रुपये है।
यूजर के हिसाब से खुद होते हैं एडजस्ट रोबोट
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ये रोबोट सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि AI सॉफ्टवेयर के जरिए बातचीत करते हैं, यादें संजोते हैं और अपनी यूजर की पसंद के हिसाब से खुद को एडजस्ट भी कर लेते हैं। कंपनी का दावा है कि Melody इंसान के मूड और भावनाओं को भी पढ़ सकती है, जबकि Harmony यूजर के साथ निजी पलों में एक्टिव पार्टनर बन सकती है।
डिफरेंट साइज और कलर में उपलब्ध
Realbotix के CEO मैट मैकमुलन के मुताबिक, इन रोबोट में पर्सनैलिटी को कस्टमाइज किया जा सकता है और इनके आर्टिफिशियल ऑर्गन अलग-अलग साइज और कलर में उपलब्ध हैं, जो पारंपरिक डिवाइस से ज्यादा वास्तविक अहसास देते हैं।
सहूलियत अब एक तरह का बनती जा रही है नशा
अब डॉ. इयान पीअरसन की पुरानी भविष्यवाणी पर अब नजर डालें तो लगता है कि तकनीक वाकई उस दिशा में बढ़ चुकी है, जिसका उन्होंने सोचा था। हालांकि, ये सवाल अब भी कायम है कि क्या इस तरह के AI रोबोट इंसानी रिश्तों की जगह ले पाएंगे या फिर ये सिर्फ एक महंगा गैजेट बनकर रह जाएंगे।
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तकनीक ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सहूलियत अब एक तरह का नशा बनती जा रही है। लोग मशीनों पर इतना निर्भर हो सकते हैं कि असली रिश्तों की अहमियत कम हो जाए और अगर ऐसा हुआ, तो शायद विज्ञान की यही प्रगति इंसान के पतन की वजह भी बन सकती है।