नई दिल्ली। गर्मी में ठंडे और ताजगी देने वाले शरबतों की मांग अधिक हो जाती है। ऐसे में समर ड्रिंक के तौर पर रूह आफजा (Rooh Afza) या पतंजली गुलाब शरबत (Patanjali Gulab Sharbat) का सेवन घर-घर में किया जाता है, लेकिन हाल ही में इन शरबतों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद तब तूल पकड़ लिया जब बाबा रामदेव ने रूह अफजा (Rooh Afza) को “शरबत जिहाद” (Sharbat Jihad) करार दिया।
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बता दें कि इस विवाद पर फूड एक्सपर्ट Revant Himatsingka ने हाल ही में सोशल मीडिया पर दोनों शरबतों के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां साझा की हैं। इसमें बताया गया कि किस तरह दोनों ही शरबतों में ऐसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है, जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
क्या है माजरा?
दरअसल, सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर फूड फार्मर (Revant Himatsingka) ने एक वीडियो साझा की है जिसमें उन्होंने पतंजली गुलाब शरबत और रूह अफजा की सामग्री का विश्लेषण किया है और बताया है कि इन दोनों ही शरबतों में चीनी की मात्रा काफी अधिक है।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पतंजली गुलाब शरबत में 99% चीनी है। इस जानकारी को छिपाने के लिए बोतल पर यह जानकारी ही नहीं दी गई है। इसके अलावा, इसमें सोडियम बेंजोएट जैसे प्रिजर्वेटिव्स भी इस्तेमाल किए गए हैं, जो शरीर के लिए काफी हानिकारक हो सकते हैं।
वहीं, रूह आफजा में 87% चीनी का इस्तेमाल किया गया है, जो बोतल पर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ भी है। इसके अलावा, इसमें आर्टिफीशियल लाल रंग का उपयोग किया गया है, जो कई देशों में प्रतिबंधित है। यह रंग बच्चों में ध्यान की समस्या पैदा कर सकता है। दोनों शरबत में प्रिजर्वेटिव्स और आर्टिफिशियल चीजें होने के कारण इनके नियमित सेवन से सेहत को नुकसान हो सकता है।
बता दें कि रूह आफजा (Rooh Afza) के बारे में विवाद तब और बढ़ गया था जब बाबा रामदेव ने इसे शरबत जिहाद करार दिया और आरोप लगाया कि इस शरबत से होने वाली आय का इस्तेमाल धार्मिक संस्थाओं को फंड देने के लिए किया जाता है।
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इसके बाद, हमदर्द लेबोरेटरीज(Hamdard Laboratories-जो Rooh Afza बनाती है), ने बाबा रामदेव और पतंजली फूड्स के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की। वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने रामदेव के बयान को अस्वीकार्य मानते हुए उनके खिलाफ अवमानना की चेतावनी दी है।
क्या इन शरबतों से बचना चाहिए?
HT में फूड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन शरबतों का सेवन सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए। खासकर बच्चों को। क्योंकि इनमें इस्तेमाल रंग और प्रिजर्वेटिव्स उनके स्वास्थ को नुकसान पहुंचा सकती हैं।