सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की जान चली गई। हादसा बेहट रोड पर बिहारीगढ़ क्षेत्र के धौलाकुआं के पास दोपहर करीब 2 बजे हुआ। एक बाइक पर सवार होकर लौट रहे परिवार को पीछे से आ रही तेज रफ्तार क्रेटा कार ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार चारों लोग सड़क से करीब 10 फीट दूर नीचे खाई में जा गिरे। हादसे के बाद क्रेटा कार भी अनियंत्रित होकर पलटते हुए खाई में गिर गई।
पढ़ें :- बांदा में थाने के अंदर पिता ने बेटी को चाकू से गोदा, लव मैरिज से था नाराज
ससुराल से लौट रहा था परिवार
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, हादसे में मलकपुर निवासी लविश (26), उसकी मां राजदुलारी (55), बहन अंजना उर्फ तन्नु (20) और 3 साल की मासूम बेटी रूही की मौत हुई है। मृतक लविश के चाचा अंकित ने बताया कि लविश मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। वह शनिवार को अपनी मां, बहन और बड़ी बेटी रूही के साथ कोठड़ी स्थित अपनी ससुराल गया था। वहां से जब वह बाइक पर सवार होकर वापस अपने गांव मलकपुर लौट रहा था, तभी रास्ते में यह काल बनकर आई कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। लविश के पीछे अब उसकी पत्नी और एक छोटा बेटा रह गए हैं।
नाबालिग चला रहा था कार
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार को एक नाबालिग लड़का चला रहा था, जो हादसे के ठीक बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि गाड़ी कोठड़ी बहलोलपुर के रहने वाले ताहिर के नाम पर दर्ज है और कार को उसका नाबालिग बेटा ही चला रहा था। पुलिस ने कार को अपने कब्जे में ले लिया है और आरोपी की तलाश की जा रही है।
पढ़ें :- NEET-PG की तैयारी कर रही MBBS डॉक्टर ने किया सुसाइड, कमरे से मिला नोट और दो वीडियो
सिस्टम की नियमबाजी पर उठे सवाल
हादसे के बाद घायलों की सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल ले जाते समय सिस्टम की लापरवाही भी सामने आई। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शीयों ने बताया कि जब एम्बुलेंस घायलों को लेकर चली, तो उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हमने एम्बुलेंस कर्मियों से उन्हें सीधे सहारनपुर के बड़े अस्पताल ले जाने को कहा। लेकिन उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पहले मरीज को नजदीकी सीएचसी ले जाना पड़ेगा। इस चक्कर में समय बर्बाद हुआ। मासूम रूही ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि बाकी तीन लोगों की मौत जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर होने के दौरान हुई। अगर आपातकालीन स्थिति में गंभीर मरीजों को सीधे बड़े अस्पताल ले जाने की छूट होती, तो शायद इनकी जान बच सकती थी।