पटना। बिहार में नई सरकार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच बीजेपी कार्यालय के पास लगे पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में लिखा था ‘वाल्मीकि समाज की यही पुकार, बिहार में हो सम्राट सरकार’। पोस्टर लगवाने वाले का नाम राजेश कुमार वाल्मीकि बताया जा रहा है। पोस्टर लगने के बाद उसे फाड़ दिया गया। बीजेपी के कार्यकर्ताओ ने ही पोस्टर फाड़ कर हटाया। बीजेपी मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि पोस्टर किसने लगाया और बीजेपी का इससे कोई लेना-देना नहीं है?
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पटना में BJP कार्यालय के गेट पर "बिहार में हो सम्राट सरकार" वाली पोस्टर को सुरक्षा कर्मियों ने हटाया!#Bihar pic.twitter.com/qHlUU3llpg
— SOURAV RAJ (@souravreporter2) April 9, 2026
भाजपा के प्रदेश कार्यालय के मुख्य द्वार पर लगे पोस्टर पर सम्राट चौधरी की बड़ी तस्वीर लगी है। साथ ही उन्हें बिहार का भविष्य और जन-जन का नेता बताया गया है। समर्थकों का कहना है कि सम्राट चौधरी ने जिस तरह से भाजपा को मजबूती दी है और पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग को एकजुट किया है, उसे देखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। पोस्टर में निवेदक के रूप में बाल्मीकि समाज संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा नेता राजेश कुमार बाल्मीकि उर्फ रमैया हैं, जो खुद भी पोस्टर में दिख रहे हैं।
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पोस्टर में लिखा है कि “बाल्मीकि समाज संघ की यही पुकार,बिहार में सम्राट की सरकार।” आगे लिखा है कि “भाजपा को हमने दिया है हर संभव साथ, ठेकेदारी प्रथा आपकी सरकार में हो समाप्त। यानी मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की मांग के साथ-साथ सम्राट चौधरी से भी यह मांग की जा रही है कि आपके मुख्यमंत्री बनते ही आप अपनी सरकार में हो रहे ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर देंगे। फिलहाल यह पोस्टर कई लोगों को बेचैन करने लगी है।
पार्टी आलाकमान इसे अनुशासनहीनता या समय से पहले की गई घोषणा मानता है
हालांकि पार्टी कार्यालय के बाहर लगे “बिहार में हो सम्राट सरकार” वाले पोस्टर को सुरक्षा कर्मियों ने हटा दिया है। अब सवाल उठता है कि भाजपा कार्यालय पर ‘सम्राट सरकार’ के आशय के पोस्टर लगे और उखड़े, क्या ‘सम्राट’ के नाम पर भाजपा में एका नहीं? इन पोस्टरों का लगना और फिर तुरंत हटाया जाना पार्टी के भीतर गुटबाजी की ओर संकेत करता है। अक्सर ऐसी घटनाएं तब होती हैं जब समर्थक अपने नेता को अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करना चाहते हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान इसे अनुशासनहीनता या समय से पहले की गई घोषणा मानता है।
मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अंदरखाने हलचल जारी है, भले ही आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्वीकार न किया जाए
फिलहाल बीजेपी ने इस पूरे मामले से खुद को अलग कर लिया है, लेकिन पोस्टर ने बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। यह घटना संकेत देती है कि मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अंदरखाने हलचल जारी है, भले ही आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्वीकार न किया जाए।