कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में भाजपा से करारी शिकस्त मिलने के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कोलकाता के कालीघाट आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बुधवार शाम बैठक की। इस बैठक में कुल 80 विधायकों को टीएमसी प्रमुख (TMC Chief) ने बुलाया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बैठक में कुल 71 विधायक ही पहुंचे। जब उनसे बाकी विधायकों के बारे में पूछा गया तो जवाब दिया गया कि हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के विधायकों को नहीं बुलाया गया था।
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विधानसभा के पहले दिन काले पहनें
सूत्रों ने बताया कि टीएमसी प्रमुख (TMC Chief) ने बैठक में कहा, कि बंगाल के बाद अब इंडिया गठबंधन टीम एकजुट है। मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, उन्हें बर्खास्त करने दो। मैं चाहती हूं कि यह एक काला दिन हो, हमें मजबूत रहना होगा। विधानसभा के पहले दिन काले पहनें।”
धोखेबाजों को पार्टी से निकाला जाएगा
आगे ममता ने कहा,कि जिन लोगों ने धोखा दिया, उन्हें पार्टी से निकाला जाएगा। मुझे हंसी आ रही है। मैंने उन्हें नैतिक रूप से पराजित कर दिया है। मैं अब एक आजाद पंछी हूं। मैंने सभी के लिए काम किया। हो सकता है हम हार गए हों, लेकिन हम लड़ेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री और प्रधानमंत्री सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं।”
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1500 से अधिक पार्टी कार्यालय पर कब्जा : टीएमसी प्रमुख
आगे सूत्र ने बताया ममता ने बैठक में कहा,कि हमें जबरन चुनाव हराए गए हैं। मैं पश्चिम बंगाल पुलिस, सीआरपीएफ, भाजपा के इशारे पर काम करने वाले मुख्य चुनाव अधिकारी और चुनाव आयोग की निंदा करती हूं। 1500 से अधिक पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया गया। मुझ पर हूटिंग की गई और धक्का मारा गया। मुझे सीने में दर्द हो रहा है। यह चुनाव नहीं बल्कि क्रूरता थी।”
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद बदलाव की बयार बहनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जो अपने गढ़ भवानीपुर में भी जीत हासिल नहीं कर पाईं, उनके आवास के बाहर से सुरक्षा घेरे को कम कर दिया गया है। सत्ता परिवर्तन के 24 घंटे बाद ही मुख्यमंत्री आवास के आसपास की सड़कों को आम जनता के लिए खोल दिया गया है। यह रास्ते बीते कई वर्षों से सुरक्षा के मद्देनजर प्रतिबंधित क्षेत्र थे।