Shivawas Ka Mahatva : महादेव के निवास स्थान कैलाश को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह स्थल भगवान शिव का स्थायी निवास स्थान है। कैलाश पर्वत पर शिव का वास होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं शिववास का अर्थ है भगवान शिव का निवास, जो हर महीने अलग-अलग तिथियों पर बदलता रहता है। वहीं कैलाश का आध्यात्मिक महत्व भी है, यह स्थान साधु-संतों के लिए सिद्धि प्राप्ति का स्थान भी है।
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शिववास के प्रकार
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव पूरे महीने में सात अलग-अलग जगह पर वास करते हैं। उनके वास स्थान से यह पता चलता है की उस समय भगवान शिव क्या कर रहे हैं और वह समय प्रार्थना के लिए उचित है या नहीं। शिववास, भगवान शिव के निवास स्थान को कहते हैं, जो तिथि के अनुसार बदलते रहते हैं। शिववास के मुख्य प्रकार हैं: कैलाश, गौरी सन्निध, वृषभारूढ़, सभा, भोजन, क्रीड़ा और श्मशान।
रूद्राभिषेक में शिववास का महत्व
वहीं रुद्राभिषेक, जो कि भगवान शिव का अभिषेक है, शुभ शिववास के दौरान किया जाना चाहिए, ताकि अभिषेक का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। शुभ फल की प्राप्ति के लिए किया जाने वाला रूद्राभिषेक शिववास की तिथियों में पूर्ण करने पर सुख, समृद्धि, और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
पापी ग्रह दोषों से मिलती है मुक्ति
जयोतिष ग्रंथों के अनुसार,शिववास में पूजा करने से शनि दोष, पितृ दोष, ग्रह दोष, मंगल दोष और कालसर्प दोष जैसे दोषों से मुक्ति मिलती है।
शिव वास का फल
शेषफल के अनुसार शिव वास का स्थान और उसका फल इस प्रकार है:
1 – कैलाश में : सुखदायी
2 – गौरी पार्श्व में : सुख और सम्पदा
3 – वृषारूढ़ : अभीष्ट सिद्धि
4 – सभा : संताप
5 – भोजन : पीड़ादायी
6 – क्रीड़ारत : कष्ट
7 – श्मशान : मृत्यु
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कैलाशे लभते सौख्यं गौर्या च सुख सम्पदः । वृषभेऽभीष्ट सिद्धिः स्यात् सभायां संतापकारिणी।
भोजने च भवेत् पीड़ा क्रीडायां कष्टमेव च । श्मशाने मरणं ज्ञेयं फलमेवं विचारयेत्।।