पर्दाफाश न्यूज़ ब्यूरो महराजगंज :: भारत-नेपाल सीमा का मुख्य द्वार माना जाने वाला सोनौली कस्बा इन दिनों सीमा पर व्यापार या पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि बेकाबू अतिक्रमण और जानलेवा जाम के लिए सुर्खियों में है। नेशनल हाईवे से लेकर गलियों तक, सड़क किनारे फैले ठेले और अवैध पार्किंग ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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संकरी होती सड़कें, बढ़ता खतरा
सोनौली का मुख्य मार्ग इन दिनों सड़क कम, पार्किंग ज़ोन ज्यादा नजर आ रहा है। सड़क के दोनों ओर कब्ज़ा किए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों और बेतरतीब खड़े वाहनों से रास्ता इतना संकरा हो चुका है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नेपाल से आने वाले पर्यटकों और निवासियों को चंद मीटर का सफर तय करने में घंटों लग रहे हैं। भीड़ के बीच से धक्का देते हुए निकलते वाहन किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बढ़ा रहे हैं।
आपातकालीन सेवाएं भी बनीं ‘बंधक’
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सबसे चिंताजनक स्थिति एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सेवाओं की है। जाम में फंसे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली देरी अक्सर गंभीर रूप ले रही है। लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी भी वक्त जानलेवा साबित हो सकती है।
मुख्य समस्याएं इस प्रकार
अवैध पार्किंग: दोपहिया और चारपहिया वाहनों की खुलेआम लाइन।
अतिक्रमण: दुकानें और ठेले मुख्य सड़क तक फैल गए।
दुर्घटना का खतरा: संकरी सड़क पर भारी वाहनों व पैदल यात्रियों का दबाव।
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प्रशासनिक सुस्ती: शिकायतों के बावजूद नहीं हुई किसी ठोस कार्रवाई।
व्यापारी और आमजन दोनों परेशान
कस्बे के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि धैर्य अब जवाब देने लगा है। उनकी मांग है कि प्रशासन विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर यातायात व्यवस्था को शीघ्र सुधारे।
प्रशासन से बड़ा सवाल
लोग पूछ रहे हैं—
“क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? सोनौली की जनता को इस जाम के जंजाल से आखिर कब मिलेगी राहत?”
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अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो सकती है।