नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार और दिग्गज बाएं हाथ के बल्लेबाज सौरव गांगुली के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। बुधवार को उन्हें आधिकारिक तौर पर आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल कर लिया गया। इस खास सम्मान को हासिल करने के साथ ही गांगुली अब क्रिकेट इतिहास के उन चुनिंदा खिलाड़ियों की फेहरिस्त में आ गए हैं जिन्होंने खेल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। वह यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले भारत के 12वें क्रिकेटर बने हैं। इस ऐतिहासिक पल पर खुशी जताते हुए सौरव गांगुली ने सोशल मीडिया के जरिए आईसीसी और बीसीसीआई सचिव जय शाह का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि इतिहास के इतने महान खिलाड़ियों के साथ इस एलीट क्लब का हिस्सा बनना उनके लिए बेहद गर्व की बात है और यह उनके पूरे क्रिकेट सफर का सबसे बड़ा सम्मान है।
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Thank you ICC and Chairman Jay shah @JayShah for inducting me in the hall of fame .. it’s a huge honour ..One of the 10 Indians to be inducted in the hall of fame ever .. Amazing to be a part of some great names .. @bcci
— Sourav Ganguly (@SGanguly99) July 8, 2026
भारतीय क्रिकेट के महानायकों की सूची में हुए शामिल
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सौरव गांगुली के इस क्लब में शामिल होने के बाद अब भारत के महान क्रिकेटरों की वह सूची और मजबूत हो गई है जिसने वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ाया। अब दादा का नाम उन दिग्गजों के साथ लिया जाएगा जिनमें सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, अनिल कुंबले, वीनू मांकड़, डायना एडुल्जी, नीतू डेविड और महेंद्र सिंह धोनी जैसे नाम पहले से ही शोभा बढ़ा रहे हैं। इन महान खिलाड़ियों की लीग में गांगुली की एंट्री ने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को जश्न मनाने का एक और बड़ा मौका दे दिया है।
ऐसा रहा ‘गॉड ऑफ ऑफसाइड’ का शानदार करियर
अगर सौरव गांगुली के अंतरराष्ट्रीय करियर पर नजर डालें तो साल 1992 से लेकर 2008 तक, यानी करीब 16 सालों तक उन्होंने मैदान पर अपनी बल्लेबाजी और कप्तानी से राज किया। 54 वर्षीय गांगुली ने भारत के लिए 113 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 7,212 रन बनाने के साथ-साथ अपनी मध्यम गति की गेंदबाजी से 32 विकेट भी चटकाए। वहीं एकदिवसीय क्रिकेट में तो उनका रिकॉर्ड और भी बेमिसाल रहा, जहां उन्होंने 311 वनडे मैचों में 11,363 रन कूटने के साथ ही पूरे 100 विकेट अपने नाम किए। गांगुली को सिर्फ उनके रनों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट को एक नया आक्रामक मिजाज देने और टीम के भीतर जीत का जज्बा पैदा करने वाले कप्तान के रूप में हमेशा याद किया जाता है। उनकी इसी कप्तानी के दौर में टीम इंडिया ने साल 2003 के वनडे विश्व कप के फाइनल तक का यादगार सफर तय किया था।