Sunetra Pawar oath-taking Ceremony : महाराष्ट्र राजभवन ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए शाम 5 बजे का समय तय किया है। गवर्नर के शाम 4 बजे मुंबई पहुंचने की उम्मीद है, क्योंकि वह अभी शहर से बाहर हैं। अधिकारियों के अनुसार, सिर्फ सुनेत्रा पवार ही डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगी। इसके साथ ही सुनेत्रा पवार को दो मंत्रालय की मिलने की उम्मीद हैं, ये खेल और आबकारी मंत्रालय हो सकते हैं।
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दरअसल, राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार की हाल ही में विमान दुर्घटना में मौत हो गयी थी। जिसके बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम पद संभालने की अटकलें चल रही थीं। उनको आज एनसीपी विधायक दल का नेता चुना जाएगा। जिसके बाद वह शाम को महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ग्रहण करेंगी। इससे पहले एनसीपी और एनसीपी-एसपी के विलय की चर्चा थी। लेकिन, सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण की आधिकारिक पुष्टि के बाद विलय की अटकलों पर विराम लग गया है।
Maharashtra: Raj Bhavan has scheduled 5 PM for the oath-taking ceremony. The Governor is expected to arrive in Mumbai at 4 PM, as he is currently out of the city. Officials have been informed that only Sunetra Pawar will take the oath pic.twitter.com/xI59lAIg0U
— IANS (@ians_india) January 31, 2026
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शरद पवार की प्रतिक्रिया
बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि उन्हें शपथ ग्रहण के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला। जब उनसे पूछा गया कि क्या पवार परिवार से कोई इस समारोह में शामिल होगा, तो उन्होंने कहा, “हमें शपथ ग्रहण के बारे में नहीं पता। हमें इसके बारे में खबरों से पता चला। मुझे शपथ ग्रहण के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “ये फैसला उनकी पार्टी ने ही लिया होगा, क्योंकि कुछ नाम सामने आ रहे हैं- जैसे प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे, संभव है कि इन्हीं लोगों ने ये तय किया हो। पार्टी के स्तर पर कोई आंतरिक निर्णय लिया गया होगा।”
पवार ने एनसीपी और एनसीपी-एसपी के विलय पर कहा, “इन परिस्थितियों में सभी को ये ध्यान रखना होगा कि हालात का सामना कैसे किया जाए? किसी न किसी को आगे आना ही पड़ेगा। पिछले चार महीनों से दोनों एनसीपी के एक होने को लेकर चर्चा चल रही है। इस प्रक्रिया का नेतृत्व अजित पवार और जयंत पाटिल कर रहे थे। अब ये (विलय) होगा या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। दोनों दल साथ आएं यही अजित की इच्छा थी।”