नई दिल्ली। देश की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को कहा कि अदालतों को केवल असाधारण परिस्थितियों में ही जमानत आदेश पर रोक लगानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में न्यायमूर्ति अभय एस ओका (Justice Abhay S Oka) और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह (Justice Augustine George Masih) की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के एक आदेश को खारिज करते हुए यह बात कही।
पढ़ें :- POK पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा- वहां के लोग हमारे अपने, एक दिन जरूर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बैठेंगे
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने धन शोधन के एक मामले में एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि हालांकि, अदालत के पास जमानत पर रोक लगाने का अधिकार है, लेकिन ऐसा केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।’
अदालतों को जमानत आदेश पर रोक लगाने से बचना चाहिए
आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा था कि अदालतों को यांत्रिक तरीके से और बिना कोई कारण बताए जमानत आदेश पर रोक लगाने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यह फैसला धन शोधन के एक मामले में आरोपी परविंदर सिंह खुराना की याचिका पर सुनाया।
पढ़ें :- सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन, पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी, 21 अगस्त को पंजाब बंद का ऐलान
खुराना ने अधीनस्थ अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश पर अस्थायी रोक लगाने के दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के फैसले को चुनौती दी थी। खुराना को पिछले साल 17 जून को धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में अधीनस्थ अदालत ने जमानत दे दी थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।