Surya Dev Arghya : जगत को प्रकाशित करने वाले सूर्य देव की पूजा उपासना करने से जीवन में रोग ,शोक, भय ,व्यधि ,बाधा समाप्त हो जाती है। वैदिक ग्रंथ और विज्ञान भी सूर्य के प्रभाव के बारे में बताते है। सूर्य दव की महिमा वर्णन ऋग्वेद में बताया गया है। इस वेद में कहा गया है कि सूर्य प्रकृति के प्रत्येक कण को जागृत करता है। सूर्य के कारण ही सृष्टि का प्रत्येक कण काम करता है और सक्रिय रहता है। सृष्टि के समस्त जीवित तत्व अपनी ऊर्जा के लिए सूर्य पर ही निर्भर करते हैं।
महत्वपूर्ण और असरकारी
सूर्य जीव मात्र की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक दुर्बलताओं को समाप्त कर प्रत्येक प्राणी को स्वस्थ और दीर्घायु बनाता है। सूर्य की किरणों में समाहित सात रंग मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण और असरकारी हैं।
सूर्य की किरणें
यदि कोई व्यक्ति सुबह स्नान करने के बाद एक कलश जल सूर्य को अर्पित करता है, तो उस जल की धार से छनकर आती सूर्य की किरणें पूरे शरीर पर पड़कर सारे रोगों को दूर करती हैं और व्यक्ति को बुद्धिमान बनाती हैं।
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ज्योतिषीय महत्व
सप्ताह में रविवार का दिन भगवान सूर्य नारायण को समर्पित है। सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व केवल वेदों और विज्ञान में ही नहीं बताया गया है, बल्कि ज्योतिष ग्रंथों में भी सूर्य को अर्घ्य देने के अनेक लाभ बताए गए हैं। सूर्य सभी ग्रहों का राजा है अतः कुंडली में सूर्य जितना बली होगा उतना ही जातक को लाभ होगा, सूर्य को जल अर्पित करने से सूर्य बली होता है।
सूर्य को बली बनाना
यदि जन्मांगचक्र में सूर्य की कमजोर स्थिति हो और सूर्य को बली बनाना हो तो सूर्य को प्रतिदिन लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दिया जाता है। नौकरी या बिजनेस में लाभ नहीं मिल रहा हो या अटका हुआ पैसा निकालना हो तो सूर्य को जल चढ़ाना लाभकारी होता है।जल में तिल मिलाकर सूर्य को अर्ध्य देने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। लाल पुष्प कुमकुम मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य बली होकर यश प्रदान करता है।