Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. बैंक अफसर की सतर्कता से राजधानी लखनऊ में 1.21 करोड़ रुपये की ठगी टली, बड़ा सवाल कहां से मिलता है साइबर ठगों को सारा ब्यौरा?

बैंक अफसर की सतर्कता से राजधानी लखनऊ में 1.21 करोड़ रुपये की ठगी टली, बड़ा सवाल कहां से मिलता है साइबर ठगों को सारा ब्यौरा?

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शाखा प्रबंधक की सतर्कता से 1.21 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी टल गई। साइबर ठगों ने 74 वर्षीय ऊषा को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर मनी लॉन्ड्रिंग में परिवार के शामिल होने का झांसा दिया था और जांच के नाम पर पूरी जमा रकम ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे थे। घबराई महिला अपनी 13 एफडी लेकर विकास नगर स्थित पीएनबी मामा चौराहा शाखा पहुंचीं और एफडी तुड़वाकर रकम ट्रांसफर कराने लगीं। बड़ी राशि देखकर डिप्टी मैनेजर इंद्राणी ने कारण पूछा, लेकिन महिला डर के कारण कुछ बताने को तैयार नहीं हुईं। इस पर शाखा प्रबंधक सवर्ण राठौर को सूचना दी गई।

पढ़ें :- Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश करेंगी 9वां बजट, पहली बार रविवार को पेश होगा आम बजट

संदेह होने पर मैनेजर ने दिखाई समझदारी

महिला की हालत देखकर मैनेजर को शक हुआ। उन्होंने जानबूझकर खाता नंबर गलत बताकर महिला को बाहर भेजा और चपरासी को पीछे लगाकर फोन पर बातचीत पर नजर रखने को कहा। इसी दौरान सामने आया कि महिला साइबर ठगों से संपर्क में है। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने महिला की काउंसलिंग की, तब उसने बताया कि ठगों ने दिल्ली बम धमाके में परिवार के शामिल होने की बात कहकर डिजिटल अरेस्ट किया है। महिला का मोबाइल भी हैक कर रखा गया था।

बैंक ​अफसर ने पुलिस को दी सूचना, खाते फ्रीज

तुरंत पुलिस और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। महिला को आईसीआईसीआई बैंक और सेंट्रल बैंक भेजकर सभी खातों को फ्रीज कराया गया, जिससे कोई रकम ट्रांसफर न हो सके। बैंक की सतर्कता और समय पर कार्रवाई से 1.21 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी होने से बच गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पढ़ें :- UP News: आशीष गोयल, संजय प्रसाद, मुकेश मेश्राम समेत ये अफसर बने अपर मुख्य सचिव

अब सवाल उठता है कि आखिरकार साइबर ठगों में को इतना ब्यौरा कहां से मिल जाता है कि किसके बैंक खाते में कितना रुपया है। साथ परिवार का सदस्य क्या करता है और क्या नाम है और किस पद पर तैनात है?

एसीपी गाजीपुर अनिद्य विक्रम सिंह ने बताया कि बैंक पहुंचीं बुजुर्ग का नाम ऊषा शुक्ला (75) है। उनके पति स्व. शिव कुमार शुक्ला पीडब्ल्यूडी में अफसर थे। बेटा शहर से बाहर नौकरी करता है। वह घर में अकेली रहती हैं। उनको 11 दिसंबर की शाम करीब पांच बजे अनजान नंबर से जालसाजों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल की। टेरर फंडिंग का आरोप लगा जेल भेजने की धमकी दी। कहा कि पति के मोबाइल नंबर और आधार का इस्तेमाल क लांड्रिंग हुई है। मनी लांड्रिंग के 50 रुपये से आतंकी फंडिंग हुई है।

मनी लांड्रिंग के 50 रुपये से आतंकी फंडिंग हुई है। पैसे का इस्तेमाल कश्मीर व दिल्ली आतंकी घटनाओं में हुआ है। इस जालसाजों ने फोन काट दिया। इसके बाद दूसरे नंबर से फोन कर सीबीआई हेड ऑफिस पुणे से बोल रहे हैं और डिजिटल अरेस्ट कर लिया है। ऊषा ने बताया कि धमकाकर जालसाजों ने 15 दिसंबर तक पति और उनके खातों की पूरी जानकारी ले ली। धमकाते हुए बताया कि 50 करोड़ रुपये जिस खाते में हैं, वे फ्रीज कर दिए गए हैं। जालसाजों ने फिर एक बैंक खाता नंबर दिया और कहा कि इसमें डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करो। जांच के बाद सही मिलने पर 50 करोड़ के अलावा ये डेढ़ करोड़ रुपये भी आपके खाते में वापस कर दिए जाएंगे।

शाखा प्रबंधक ने रेकी के लिए भेजा बैंक कर्मचारी

शाखा प्रबंधक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बुजुर्ग के पीछे एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को इस हिदायत  के साथ भेजा कि देखिए वह क्या बात करती हैं। बैंक कर्मचारी ने लौटकर बताया कि ऊषा ठगों की शिकार हैं। मैनेजर ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों और पुलिस को दी। पूर्व में हुई घटनाओं का हवाला दिया। इसके बाद ऊषा को समझ आया और उन्हें राहत मिली। पीएनबी मंडल प्रमुख राज कुमार सिंह तथा मुख्य प्रबंधक रामबाबू महिला के घर पहुंचे। उन्होंने भी समझाया कि डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता। आपने कोई टेरर फंडिंग नहीं की है।

पढ़ें :- RCB vs UPW Head to Head : आज आरसीबी और यूपी वॉरियर्ज़ की होगी भिड़ंत; जानें- किसका पलड़ा रहा भारी
Advertisement