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ड्रैगन की दहाड़ : चीन ने की ताइवान की घेराबंदी तेज़, युद्ध के मुहाने पर एशिया

By santosh singh 
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नई दिल्ली। चीन (China) का दावा किया है कि ताइवान उसी का एक हिस्सा है और एक न एक दिन वह इसे अपने साथ मिलाकर ही मानेगा। चीन एक ओर इसे “वन चाइना पॉलिसी” (One China Policy) कहता है और वहीं दूसरी ओर ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश मानता है। ताइवान के पास उसकी अपनी सरकार, अपनी सेना और अपना संविधान है, जिसे वह छोड़ना नहीं चाहता है।

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अमेरिका की एंट्री से आग में घी

हालांकि अमेरिका और ताइवान के बीच कोई औपचारिक सैन्य संधि नहीं है, लेकिन अमेरिका ने एक कानून (Taiwan Relations Act) बनाया है जिसके तहत वह ताइवान को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार भी देता है। हाल ही में अमेरिका ने ताइवान को बहुत ही नई तकनीकी का मिसाइल सिस्टम देने का फैसला किया है। इस तरह की अमेरिकी गतिविधि को देखते हुए चीन को लगता है कि अमेरिका ताइवान को चीन से अलग करने के लिये साज़िश रच रहा है।

चीन का ‘घेराबंदी’ वाला दांव

चीन अब सिर्फ बयान नहीं दे रहा, बल्कि वह ताइवान के चारों तरफ अपनी ताकत दिखा रहा है। चीन के युद्धपोत ताइवान के समुद्री इलाके के बहुत करीब आ गए हैं। इसके आलावा आए दिन चीन के दर्जनों लड़ाकू विमान ताइवान की सीमा के पास उड़ान भरते रहते हैं ताकि ताइवान की वायु सेना को थकाया जा सके और उन पर मानसिक रूप से दबाव बनाया जा सके।

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साइबर हमले

एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन ताइवान के सरकारी सिस्टम और इंटरनेट को ठप करने की कोशिश भी कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) अपने कार्यकाल के दौरान ताइवान को चीन में मिलाना चाहते हैं। हाल के महीनों में चीन की भाषा बहुत आक्रामक हो गई है। वे अब “शांतिपूर्ण एकीकरण” की जगह “सैन्य कार्रवाई” के संकेत दे रहे हैं। दुनिया को डर है कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया, तो अमेरिका और जापान जैसे देश भी इसमें कूद सकते हैं, जिससे यह एक बड़े महायुद्ध का रूप ले सकता है।

भारत और दुनिया के लिए यह क्यों चिंताजनक है?

चिप का संकट: सबसे एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स (दुनिया के 90% से ज्यादा) ताइवान में बनते हैं। अगर युद्ध हुआ तो पूरी दुनिया में फोन, कार, और कंप्यूटर मिलने बंद हो जाएंगे या बहुत महंगे हो जाएंगे। जिस समुद्री रास्ते (South China Sea) से ताइवान घिरा है, वहां से भारत समेत कई देशों का अरबों डॉलर का व्यापार होता है और युद्ध की स्थिति में यह रास्ता बंद हो जाएगा जिससे सरे व्यापार ठप हो जायेंगे।

फिलहाल स्थिति ऐसी है कि दोनों तरफ से सेनाएं अलर्ट पर हैं। चीन का गुस्सा सातवें आसमान पर है और अमेरिका पीछे हटने को तैयार नहीं है। आलम ये है कि अब ताइवान एक “टाइम बम” की तरह बन गया है जो कभी भी फट सकता है।

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रिपोर्ट : सुशील कुमार साह

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