नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी आदेश में कहा है कि ये प्लेटफॉर्म एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल (Watermark ) लगाएं। ऐसी सामग्री में पहचान के लिए संकेत जरूर होने चाहिए। सरकार ने कहा कि एक बार एआई लेबल या मेटा डाटा लगाने के बाद उसे हटाया या दबाया नहीं जा सकता।
पढ़ें :- India Internet Users 2025 : भारत के गांवों में शहरों से ज्यादा बढ़ा शॉर्ट्स का क्रेज, इंटरनेट यूजर्स की संख्या 95 करोड़ पार
सरकार ने कहा कि अब मानव निर्मित या कृत्रिम रूप से बनाई गई जानकारी को स्पष्ट रूप से पहचान योग्य लेबल (Watermark) के साथ दिखाना अनिवार्य होगा। इसमें ऑडियो, वीडियो, फोटो या ग्राफिक सहित किसी भी डिजिटल सामग्री को शामिल किया गया है, जिसे कंप्यूटर या किसी संसाधन से बनाया गया, संशोधित किया गया या बदला गया हो।
सामग्री के गैरकानूनी इस्तेमाल पर रोक सुनिश्चित करें प्लेटफॉर्म
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी यूजर ऐसी सामग्री का गलत इस्तेमाल न करे। अगर कोई यूजर गैरकानूनी, अश्लील, धोखाधड़ी या बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनाए या साझा करे, तो प्लेटफॉर्म्स उसे रोकने के लिए स्वचालित (ऑटोमेटेड) तकनीक का इस्तेमाल करेंगे।
हर तीन महीने में यूजर के लिए जारी करनी होगी चेतावनी
पढ़ें :- World Economic Forum 2026 : सेल्सफोर्स सीईओ मार्क बेनियोफ ने चेताया, बोले- एआई बना 'सुसाइड कोच', अब इस पर लगाम कसना जरूरी
प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को कम से कम हर तीन महीने में चेतावनी देनी होगी कि नियमों का उल्लंघन करने पर दंड या सजा हो सकती है। यदि कोई नियम तोड़े, तो उसका खाता निलंबित किया जा सकता है या सामग्री को हटाया जा सकता है।
नियमों के उल्लंघन पर तीन घंटे में सूचना देना अनिवार्य
सरकार ने कार्रवाई की समयसीमा भी घटा दी है। पहले 36 घंटे में कार्रवाई करनी थी, अब तीन घंटे में सूचना देना अनिवार्य है। उल्लंघन होने पर प्लेटफॉर्म्स को तुरंत उचित कार्रवाई करनी होगी। यह कदम डिजिटल मीडिया में सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इससे यूजर्स को यह पता चलेगा कि कौन-सी जानकारी वास्तविक है और कौन-सी कृत्रिम रूप से बनाई गई है।