लखनऊ। 14 अप्रैल मंगलवार को 11:45 पर सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश कर गए हैं। इसी के साथ खरमास समाप्त (Kharmas Concluded) हो गया है। 15 अप्रैल से विवाह मुहूर्त शुरू हो गया है। इस वर्ष अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। अधिक मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) होगी और चातुर्मास प्रारम्भ (Chaturmas Commences) होगा। विवाह कार्य रुक जाएंगे। 20 नवम्बर से देवोत्थान एकादशी (Devotthan Ekadashi) के बाद विवाह कार्य होंगे।
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विवाह के लिए शुभ मुहूर्त
अप्रैल- 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29
मई- 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13 व 14
जून- 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 व 29
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जुलाई- 1, 6, 7, 11 व 12
नवम्बर- 21, 24, 25 व 26
दिसम्बर- 2, 3, 4, 5 व 6
बनारसी पंचांग के अनुसार, खरमास के बाद शादी-विवाह के कुल 38 शुभ मुहूर्त हैं। वहीं, मिथिला पंचांग में चातुर्मास तक कुल 21 लग्न मुहूर्त बताए गए हैं। काशी के महावीर पंचांग के अनुसार, अप्रैल में 10, मई में 10, जून में 11 और जुलाई में सात वैवाहिक लग्न निर्धारित हैं।
इसके बाद चार महीने के लिए चातुर्मास लग जाएगा, जिसमें मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। वैवाहिक बंधन को सबसे पवित्र संबंध माना गया है, इसलिए इसमें ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति जरूरी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार विवाह के लिए विशेष रूप से बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना आवश्यक होता है।
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माघ और फाल्गुन में विवाह करना शुभ
शादी-ब्याह के शुभ लग्न और मुहूर्त के निर्धारण के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन लग्न में से किसी एक का होना जरूरी माना जाता है। वहीं, नक्षत्रों में अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा और चित्रा में से किसी एक का होना शुभ होता है। इसके अलावा माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ मास में विवाह करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।