नई दिल्ली। यूके सरकार को चागोस द्वीप समूह मॉरीशस को वापस सौंपने वाले अपने कानून को रोकना पड़ा है। यूएस ने इस समझौते से अपना समर्थन वापस ले लिया है। शुक्रवार को, UK सरकार के अधिकारियों ने माना कि उनके पास मौजूदा संसदीय सत्र में कानून पास करने के लिए अब समय नहीं बचा है, जो आने वाले हफ़्तों में खत्म हो जाएगा। चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को वापस सौंपने की UK की कोशिश में यह ताज़ा झटका तब लगा, जब US और UK का साझा सैन्य अड्डा डिएगो गार्सिया मौजूद है। यह सीधे तौरे पर US और UK के बिगड़ते रिश्तों का संकेत है। यह सब तब हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को संभालने के तरीके को लेकर कीर स्टारमर की कड़ी आलोचना की थी।
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यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी इस योजना की आलोचना की थी, जिसे US विदेश विभाग का समर्थन हासिल था। उन्होंने स्टारमर से कहा था कि वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं, क्योंकि वे द्वीपों की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप रहे हैं, जिसके बदले में UK और US को अपने हवाई अड्डे का इस्तेमाल जारी रखने की अनुमति मिलेगी। हालाँकि, इससे पहले फ़रवरी में ट्रंप ने इसे सबसे अच्छा सौदा बताया था, जो प्रधानमंत्री इन परिस्थितियों में कर सकते थे। US राष्ट्रपति ने पिछले साल जब स्टारमर व्हाइट हाउस आए थे, तब भी इस हस्तांतरण का समर्थन किया था।
इस समझौते के तहत UK चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप देगा। इस द्वीपसमूह के सबसे बड़े द्वीप डिएगो गार्सिया को 99 साल के लिए पट्टे पर लेगा। ताकि वहां साझा सैन्य अड्डे का संचालन जारी रखा जा सके। US ने 1966 की ब्रिटिश-अमेरिकी संधि में संशोधन के लिए औपचारिक रूप से पत्रों का आदान-प्रदान नहीं किया था और माना जाता है कि इसी वजह से UK को अपना बिल वापस लेना पड़ा। अब मई में होने वाले किंग्स स्पीच में किसी नए चागोस बिल के शामिल होने की उम्मीद नहीं है। इसी भाषण में आने वाले संसदीय सत्र के लिए सरकार का एजेंडा बताया जाता है।