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Green Vegetables Price : मंडी और फुटकर सब्जियों के रेट में है जमीन-आसमान का अंतर, भिंडी 3 रुपये, तोरई 6 और करेला 15 रुपये किलो

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। थोक मं​डी (Wholesale Market) में हरी सब्जियों के रेट बुरी तरह गिर गए हैं। भिंडी 3 रुपये, बोड़ा 3 रुपये, तोरई 6 रुपये, करेला 15 रुपये किलो बिक रहा है। लौकी भी 5 से 10 रुपये पीस मिल रही है। हरी मिर्च 40 रुपये किलो पर आ गई है। पहली नजर में आपको यह फेक न्यूज लग सकती है, लेकिन सौ फीसदी सच है। हरी सब्जियों के मंडी रेट और फुटकर रेट में जमीन आसमान का अंतर है।

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हरी सब्जियों के फुटकर और थोक रेट

शिवसागर दिल्ली में सब्जी की दुकान लगाते हैं। आजादपुर मंडी (Azadpur Mandi) से सब्जियां लाना उनका रोज का काम है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के आजादपुर मंडी (Azadpur Mandi) में शनिवार को भिंडी 20 रुपये किलो बिका तो फुटकर में 60 रुपये बिक रहा था। तोरई 15 रुपये किलो, अमरोहा वाली तोरई 24 रुपये किलो, लोकल तोरई 25 रुपये किलो, बोड़ा 20 रुपये किलो, करेला 12 रुपये किलो बिकी। यही सब्जियां फुटकर में 40 से 60 रुपये किलो बिक रही हैं।

दूसरी ओर अगर फुटकर रेट की बात करें तो दिल्ली-नोएडा से लेकर किसी भी महानगर में इन्हीं सब्जियों के रेट फुटकर में 40 रुपये से 60 रुपये किलो हैं। जबकि, छोटे कस्बों और गांवों में महज दो से तीन गुने का अंतर है।

किस मंडी में इतनी सस्ती मिल रहीं हरी सब्जियां

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आप पूछेंगे कि किस मंडी में भिंडी 3 रुपये और तोरई यानी नेनुआ 6 रुपये किलो मिल रहा है? तो जवाब है उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले कस्बे कप्तानगंज की थोक सब्जी मंडी में। दरअसल पिछले कई दिनों से यहां सब्जियों के रेट काफी गिरे हुए हैं। एक किसान मंडी में 1 क्विटल बोड़ा लाते हैं तो 1 क्विटल गाय को खिला देते हैं।

हरी सब्जियों से लहलहाते खेत, फिर भी क्यों उदास हैं किसान

इसी जिले के मथौली कस्बे में किसान गिरजा यादव एक खेत हुंडी यानी किराए पर लिए हैं। उनके खेत में भिंडी की फसल लहलहा रही है। पौधे भिडिंयों से लदे पड़े हैं। रविवार सुबह उनके खेत में गिरजा और घर के ही दो और सदस्य भिंडी तोड़ने में लगे थे। कई बोरे भिंडी तोड़ने के बावजूद उनके चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी। गिरजा कह रहे थे कि लागत तो छोड़िए अपनी मजदूरी भी नहीं निकल रही। एक क्विटल भिंडी अगर मंडी में बेचेंगे तो 300 रुपये मिलेंगे। अपने लोकल मार्केट में कम से कम 600 तो मिल ही जाएंगे।

गिरजा यादव बताते हैं कि उधर बेमौसम बारिश हुई तो हरी सब्जियों की पैदावार अचानक बढ़ गई। इससे मंडियों और छोटे-छोटे बाजारों में भी हरी सब्जियों के रेट काफी गिर गए। यही भिंडी, करेला, परवल, तोरई एक महीने पहले 60 रुपये से ऊपर थे। इसके अलावा लोग अब छतों पर भी हरी सब्जियां उगाने लगे हैं। इसका प्रभाव भी मार्केट पर पड़ रहा है।

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