Viral-Video: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। चार गांवों के स्कूली बच्चे रोजाना की दूरी बचाने के लिए उफनती बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के संकरे हिस्सों पर छलांग लगाकर स्कूल पहुंच रहे थे। बारिश के बीच मौत को चुनौती देते इन बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो प्रशासन भी हरकत में आ गया।
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घटना ग्राम पंचायत जीवाजीपुर के पलोह गांव की है। यहां के साथ-साथ ककरुआ, इमलिया, बंधेरा और बहलोद चक के छात्र पलोह स्थित शासकीय हाई स्कूल में पढ़ने आते हैं। सड़क मार्ग से स्कूल पहुंचने पर 10 से 15 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि स्टॉप डैम पार करने पर दूरी महज डेढ़ किलोमीटर रह जाती है। इसी वजह से बच्चे रोज इसी खतरनाक रास्ते को चुन रहे थे।
बारिश के कारण बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ने से स्टॉप डैम और भी खतरनाक हो गया था। वायरल वीडियो में छात्र-छात्राएं तेज बहाव के बीच डैम के संकरे मोहरों पर छलांग लगाते नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एक भी बच्चा पैर फिसल जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
वीडियो सामने आते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्टॉप डैम से लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी। मौके पर चौकीदार तैनात कर दिए गए हैं ताकि कोई भी व्यक्ति इस रास्ते का इस्तेमाल न कर सके। ग्रामीणों का कहना है कि असली समाधान केवल रास्ता बंद करने से नहीं होगा। उनका मानना है कि इस क्षेत्र में स्थायी पुल का निर्माण जरूरी है, ताकि बच्चों को भविष्य में अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल न जाना पड़े।
"बच्चों को शिक्षा नहीं, मौत का रास्ता दिया जा रहा है!"
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मध्य प्रदेश के विदिशा में स्कूली बच्चों को उफनते स्टॉप डैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाना पड़ रहा है। ज़रा सोचिए, अगर एक भी बच्चा फिसल जाए तो उसकी मौत का जिम्मेदार कौन होगा।
सरकार शिक्षा के नाम पर करोड़ों के दावे और विज्ञापन… pic.twitter.com/DIDF5hQKcz
— Shama Parveen (@ShamaParveen70) August 4, 2026
एसडीएम क्षितिज शर्मा ने बताया कि बंधेरा के स्कूल को हाई स्कूल में उन्नत करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। फिलहाल वहां कक्षा 9 और 10 के कुल 10 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो किलोमीटर से अधिक दूरी वाले छात्रों को पहले ही साइकिलें दी जा चुकी हैं और वे सड़क मार्ग से सुरक्षित स्कूल पहुंच सकते हैं, लेकिन समय बचाने के लिए डैम का रास्ता चुन रहे थे। प्रशासन ने यह भी बताया कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के माध्यम से स्टॉप डैम पर स्लैब डालने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर आवागमन अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। फिलहाल बारिश के मौसम को देखते हुए इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।