वॉशिंगटन। अमेरिका से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां करीब 27 वर्षों से कानूनी रूप से रह रही भारतीय मूल की एक बुजुर्ग ग्रीन कार्ड धारक (Permanent Resident) महिला को अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन ने हिरासत में ले लिया है। इस तरह की कार्रवाई के बाद से अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय और प्रवासियों के बीच गहरी चिंता और नाराजगी है।
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क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, हिरासत में ली गई महिला की पहचान ‘वेंकटा नरसमांबा वासमसेट्टी’ (Venkata Narsamamba Vasamsetty) के रूप में हुई है। वेंकटा पिछले 27 सालों से अपनी पहचान और वैध ग्रीन कार्ड के साथ अमेरिका में रह रही हैं। वह उत्तरी कैरोलिना के एक स्कूल में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाती हैं।
हिरासत की वजह आई सामने
‘अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग’ ने यह कार्रवाई नियमों का हवाला देते हुए की है। इसके अलावा अधिकारियों का आरोप है कि वेंकटा ने साल 2022 में लगभग सात महीने का समय भारत में बिताया था। अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार, यदि कोई ग्रीन कार्ड धारक बिना पूर्व अनुमति के लगातार 6 महीने से अधिक समय देश से बाहर बिताता है, तो इसे ‘स्थाई निवास छोड़ने की मंशा’ (Intention to leave permanent residence) के रूप में देखा जा सकता है। इसी आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया है।
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परिवार और वकीलों ने दी दलील
इस कार्रवाई के बाद वेंकटा के परिवार और वकीलों ने कड़ा विरोध जताया है। उनकी बेटी, जो खुद अमेरिका में एक आव्रजन वकील हैं, ने बताया कि उनकी मां 2022 में कोरोना महामारी के दौरान भारत में अपने बेहद बीमार माता-पिता की देखभाल करने गई थीं। परिवार ने कोर्ट में यह साबित करने के लिए दस्तावेजी सबूत भी पेश किए कि वेंकटा का अमेरिका छोड़ने का कोई इरादा नहीं था। इन दस्तावेजों में वहां उनका अपना घर होना भी शामिल है।
कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी कार्रवाई
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसी साल मई 2026 में एक अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने सरकार द्वारा उन्हें देश निकाला करने के इस केस को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद भी 11 अगस्त 2026 को जब वह एक रूटीन इमिग्रेशन चेक-इन के लिए गईं, तो उन्हें एकाएक हिरासत में ले लिया गया।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता, सोशल मीडिया पर कैंपेन शुरू
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वर्तमान में वेंकटा जॉर्जिया के इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर में बंद हैं। परिवार के मुताबिक, वह गंभीर रूप से डायबिटीज की मरीज हैं, जिसके कारण डिटेंशन सेंटर में उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। आपको बता दें कि उनकी इस अचानक गिरफ्तारी के खिलाफ परिवार ने आपातकालीन कानूनी याचिका ‘Emergency legal petition’ दायर की है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई के लिए “Free Venkata” नाम से एक बड़ा अभियान भी शुरू हो गया है, जिसमें मानवाधिकार कार्यकर्ता और भारतीय-अमेरिकी समुदाय लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।