H-1B वीजा को लेकर एक बार फिर अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विदेशी कर्मचारियों को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ऐसा बयान दिया है जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। अब वेंस अपने बयान पर सफाई दे रहे हैं। आखिर H-1B वीजा को लेकर अमेरिका में इतनी बहस क्यों हो रही है और भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या पड़ सकता है असर?
अमेरिका। H-1B वीजा को लेकर एक बार फिर अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विदेशी कर्मचारियों को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ऐसा बयान दिया है जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। अब वेंस अपने बयान पर सफाई दे रहे हैं। आखिर H-1B वीजा को लेकर अमेरिका में इतनी बहस क्यों हो रही है और भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या पड़ सकता है असर?
आइए समझते है H-1B वीजा क्या है?
यह अमेरिका की एक विशेष वर्क वीजा श्रेणी है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और दूसरे विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। इस व्यवस्था का इस्तेमाल बड़ी संख्या में भारतीय IT प्रोफेशनल्स भी करते हैं। ऐसे में अमेरिकी वीजा नीतियों में बदलाव का असर भारतीय कर्मचारियों और कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
दरअसल, अक्टूबर 2026 में H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर अमेरिका में बहस तेज हो गई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर नियुक्त करके अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों और वेतन पर दबाव डाल रही हैं।
इसी दौरान उन्होंने H-1B कर्मचारियों के लिए ‘foreign indentured servants’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उसके बाद इस बयान की भारत में आलोचना हुई और विदेश मंत्रालय ने इसे अनुचित और बेहद आपत्तिजनक बताया। वहीं 18 अक्टूबर के आसपास सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, जेडी वेंस ने अपने बयान पर सफाई देते हुए माना कि उनकी भाषा सही नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना विदेशी कर्मचारियों के बजाय उन कंपनियों और व्यवस्था को लेकर थी, जिनके जरिए कर्मचारियों का कथित शोषण होता है। साथ ही उन्होंने अपनी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस के परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने भारतीय ससुराल वालों से बेहद प्यार करते हैं।हालांकि, वेंस ने H-1B व्यवस्था में बदलाव और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा की अपनी मांग वापस नहीं ली।
भारतीय कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
इसी बीच, ट्रंप प्रशासन ने कई टेक्नोलॉजी कंपनियों को PERM यानी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ी कार्रवाई के दायरे में लिया है। PERM प्रक्रिया और H-1B वीजा अलग-अलग हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि PERM आवेदनों पर रोक लगने का मतलब अपने आप मौजूदा H-1B वीजा रद्द होना नहीं है। हालांकि, प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।