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WTO की डायरेक्टर न्गोजी ओकोंजो ने वैश्विक व्यापार को लेकर दिए कड़े संदेश, कहा- बदलाव को पलटा नहीं जा सकता

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। 14वें WTO मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में WTO की डायरेक्टर-जनरल न्गोजी ओकोंजो-इवेला ने बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बारे में एक कड़े संदेश के साथ सभा को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में ऐसा बदलाव आया है, जिसे पलटा नहीं जा सकता। अब देशों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि भविष्य के लिए इस प्रणाली को कैसे अपनाया जाए और उसमें सुधार किया जाए। प्रतिनिधियों को दिए अपने भाषण के दौरान ओकोंजो-इवेला ने कहा कि जिस विश्व व्यवस्था और बहुपक्षीय प्रणाली को हम पहले जानते थे, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है। हम उसे वापस नहीं पा सकते और हमें भविष्य की ओर देखना होगा। इस टिप्पणी ने उन बड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया जिनका सामना वैश्विक व्यापार प्रणाली को मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, ओकोंजो-इवेला ने बताया कि 72 प्रतिशत वैश्विक व्यापार अभी भी WTO के नियमों के तहत ही होता है।

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डायरेक्टर जनरल न्गोजी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े व्यापार में हो रही वृद्धि को भी स्वीकार किया और इसे एक अनिश्चित माहौल में एक आशाजनक विकास बताया। हालांकि WTO प्रमुख ने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष से पैदा होने वाले जोखिमों और दुनिया भर के देशों पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को लेकर चिंता जताई, जिसके कारण वैश्विक व्यापार में काफी अनिश्चितता पैदा हो गई है। उन्होंने जिन मुख्य मुद्दों पर प्रकाश डाला, उनमें WTO की विवाद समाधान संस्था का ठप पड़ जाना और सब्सिडी संबंधी सूचनाओं में पारदर्शिता की कमी शामिल थी। ओकोंजो-इवेला के अनुसार 2025 के लिए केवल 64 सदस्यों ने ही सब्सिडी संबंधी सूचनाएं जमा की थीं, जबकि 102 सदस्यों ने ऐसा नहीं किया था। उन्होंने तर्क दिया कि पारदर्शिता की इस कमी से अविश्वास और अनुचित प्रथाएं पनपती हैं, जिससे WTO के सदस्यों के लिए नए नियमों और सुधारों पर सहमत होना और भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने समझाया पारदर्शिता की कमी से विश्वास की कमी पैदा होती है और इससे अनुचितता सहित प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहारों को लेकर संदेह पैदा होता है। इससे अविश्वास बढ़ता है और सदस्य नए नियमों तथा सुधारों पर सहमत होने से पीछे हटते हैं। एक सकारात्मक घटनाक्रम के तहत ओकोंजो-इवेला ने तुर्की के व्यापार मंत्री ओमर बोलात को भी सम्मेलन को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया। बोलात ने घोषणा की कि तुर्की ने विकासशील देशों में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए गए एक प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति वापस ले ली है, जिसे अब WTO के ढांचे में शामिल किया जाएगा। यह खुलासा वैश्विक व्यापार प्रणाली के भीतर अधिक सहयोग की दिशा में एक कदम का संकेत देता है। भले ही WTO और उसके सदस्यों को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो।

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