नई दिल्ली। यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल पर अपने पहले हमले की पुष्टि की है। समूह का कहना है कि बैलिस्टिक मिसाइल हमला, जिसे इजरायल ने रोक दिया था, उसका निशाना कब्जे वाले वेस्ट बैंक के दक्षिण में स्थित इजरायली सैन्य ठिकाने थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध पर NATO की प्रतिक्रिया से बहुत निराश हैं। एक बिजनेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि मैंने हमेशा कहा है कि NATO एक कागज़ी शेर है। और मैंने हमेशा कहा कि हम NATO की मदद करते हैं, लेकिन वे कभी हमारी मदद नहीं करेंगे।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि इजरायल द्वारा दो नागरिक परमाणु ठिकानों और स्टील फैक्ट्रियों पर हमला करने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, जबकि ईरान की सेना ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी कि वे ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करके आग से खेल रहे हैं। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने कहा कि अरदकान येलोकेक उत्पादन संयंत्र पर हुए हमले से किसी भी रेडियोधर्मी पदार्थ का रिसाव नहीं हुआ, जिस पर खोंदाब भारी जल सुविधा के साथ ही हमला किया गया था। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दो मार्च से अब तक पूरे देश में इजरायली हमलों में 1,142 लोग मारे गए हैं और 3,315 घायल हुए हैं। ईरान-इजराइल युद्ध के 28 दिन बाद अब हूती विद्रोही भी इसमें शामिल हो गए हैं। इजरायल के अखबार के मुताबिक यमन में मौजूद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने करीब दो हजार किलोमीटर दूर इजराइल के दक्षिणी शहर बेर्शेबा और आसपास के इलाकों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। इजराइली सेना के मुताबिक, मिसाइल लॉन्च का पता चलते ही एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव किया गया और खतरे को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। इस हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। मौजूदा जंग के दौरान यमन से इजराइल पर यह पहला हमला माना जा रहा है।