New Delhi: तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरे और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सांगठनिक प्रभारी नितिन नवीन को सौंपा, जिसे मंजूर भी कर लिया गया। दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद अन्नामलाई ने बिना किसी टकराव के एक सम्मानजनक विदाई का रास्ता चुना।
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‘राष्ट्रवादी-तमिल’ आंदोलन से नई पारी की तैयारी
अन्नामलाई के इस कदम को सिर्फ इस्तीफे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक वे तमिलनाडु में राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन पर आधारित एक गैर-राजनीतिक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं, जिसे भविष्य में राजनीतिक दल में बदला जा सकता है। अपनी अगली रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए वे 7 जून को अपने कोर समर्थकों के साथ एक बड़ी बैठक करेंगे। सूत्रो के मुताबिक आरएसएस भी चाहता है कि वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहें।
2 जून को अमित शाह और के. अन्नामलाई की हुई थी मुलाकात
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क्यों अलग हुईं राहें?
यह फैसला अचानक नहीं हुआ, इसके संकेत पिछले कुछ समय से मिल रहे थे। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उनकी जगह नैनार नागेंद्रन को अध्यक्ष बना दिया था और अन्नामलाई ने खुद चुनाव भी नहीं लड़ा था। इसके अलावा, सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति को तुरंत लागू करने पर उन्होंने अपनी ही सरकार को घेरा था। साथ ही, एआईएडीएमके के साथ भाजपा के गठबंधन को लेकर भी उनकी असहमति जगजाहिर थी।
भाजपा को कितना नुकसान?
अन्नामलाई का जाना तमिलनाडु में भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है। पिछले कुछ सालों में वे राज्य में पार्टी का सबसे बड़ा और लोकप्रिय चेहरा बन चुके थे। सोशल मीडिया और शहरी मध्यम वर्ग के युवाओं के बीच उनकी जबरदस्त पकड़ थी। फिलहाल राज्य में उनके कद और लोकप्रियता वाला दूसरा कोई नेता नहीं दिख रहा है, जिससे भाजपा के लिए युवाओं के बीच पकड़ मजबूत बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।