मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने गुरुवार को बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली (Bollywood actor Aditya Pancholi) की एक पिटीशन पर सुनवाई की, जिसमें 2019 में मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे को रद्द करने की मांग की गई थी। अभिनेता के अधिवक्ता प्रशांत पाटिल ने पिटीशन को रद्द करने की बात दोहराई। इस मामले में पंचोली को आरोपी बनाया गया है, लेकिन शिकायत करने वाली एक महिला बॉलीवुड अभिनेत्री (bollywood actress) हैं। प्रशांत पाटिल ने बताया कि पुलिस की ओर से पेश हुए सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस के 11 नोटिस भेजने के बावजूद, पीड़िता जांच के लिए पेश नहीं हुई। इसके बाद, बॉम्बे HC ने गुरुवार को एक नया नोटिस जारी किया, जिसमें उसे 24 फरवरी को तय अगली तारीख पर पेश होने का निर्देश दिया गया है।
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बता दे कि अभिनेता आदित्य पंचोली के खिलाफ 27 जून, 2019 को दर्ज एफआईआर पर विवाद जारी है। आरोपी ने दावा किया कि शिकायत कथित घटना के लगभग 15 साल बाद दर्ज की गई है और इसे गलत इरादे से दर्ज कराया गया है। सुप्रीम कोर्ट के भजनलाल फैसले का हवाला देते हुए, याचिका में एफआईआर रद्द करने की भी मांग की गई। प्रशांत पाटिल ने बताया कि घटना से पहले एक व्यक्ति आदित्य पंचोली से मिला था, जिसकी रिकॉर्डिंग उनके पास है। रिकॉर्डिंग कोर्ट में पेश की गई है, जिसमें इसे दोबारा दर्ज करने के पीछे गलत इरादा बताया गया है। यह केस अभी कोर्ट में पेंडिंग है और अगली सुनवाई 24 फरवरी, 2026 को होगी। 2019 में मुंबई पुलिस ने एक बॉलीवुड एक्ट्रेस की शिकायत पर पंचोली के खिलाफ कथित रेप के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की थी। वर्सोवा पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत में, पंचोली पर इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 376 (रेप), 328 (ज़हर देकर चोट पहुंचाना), 384 (ज़बरदस्ती वसूली), 341 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत तरीके से कैद करना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए गए थे। एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद अभिनेता ने कहा था कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।