ज्योतिष के अनुसार, अमावस्या के दिन पितृ धरती पर आते हैं। पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दीपदान, तर्पण और उनके निमित्त पूजा की जा सकती है। इस दिन आफ गरीबों या फिर मंदिर में जाकर तिल का दान कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त गाय को चारा और पक्षियों को दान किया जाता है। माना जाता है कि इससे पितृ दोष दूर होता है।
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इन मंत्रों का करें जाप
– ऊं पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वाहा मंत्र जल तर्पण करते समय 11 या 21 बार जपें।
– ऊं तत्पुरुषाय विद्महे, महामृत्युंजय धीमहि, तन्नो पितृ प्रचोदयात् मंत्र का जप कर सकते हैं।
– ऊं नमो भगवते वासुदेवाय पितृ दोष निवारणाय स्वाहा मंत्र का जप करें।
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– ऊं पितृ देवतायै नमः मंत्र जप सकते हैं।
– ऊं देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च, नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम: मंत्र का जप करें।