नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Founder Abhijit Deepke) 20 जून को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले शुक्रवार को पीएम मोदी (PM Modi) को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने पीएम मोदी (PM Modi) से अपील कि की वह उन छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा दें, जिनकी परीक्षा से जुड़े विवादों के बीच कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई। इसके साथ ही उन्होंने पेपर लीक की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) को पद से हटाने की अपनी मांग दोहराई है।
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Open Letter to PM:
We urge PM @narendramodi to provide ₹1 crore in compensation to the families of students who died by suicide due to the paper leak crisis. pic.twitter.com/p6gOuNRvsT
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) June 19, 2026
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पत्र में छात्रों की आत्महत्या का जिक्र
पीएम मोदी (PM Modi) को लिखे अपने पत्र में दीपके ने कहा कि मैं आज भारी मन से आपको लिख रहा हूं ताकि आपका ध्यान एक बढ़ते हुए संकट की ओर आकर्षित कर सकूं जो हमारे देश के भविष्य यानी हमारे युवा छात्रों के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है।’ उन्होंने अपने पत्र में दावा किया कि हाल के हफ्तों में पेपर लीक की वजह से 11 छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से पांच मौतें पिछले 48 घंटों में हुई हैं। स्थिति और खराब हो रही है क्योंकि छात्र दोबारा परीक्षा को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग
अपने पत्र में दीपके ने केंद्र सरकार से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता देने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि कई परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के सपनों को पूरा करने के लिए भारी-भरकम एजुकेशनल लोन लिया था। जिन बच्चों की शिक्षा पर उन्होंने अपनी जीवन भर की बचत खर्च कर दी थी, उन्हें खोने के बाद ये परिवार पूरी तरह से बेसहारा हो गए हैं।’ ऐसे में पेपर लीक से प्रभावित परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया जाए।
‘जवाबदेही तय करे सरकार’
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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में दीपके ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी पिछले एक महीने से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है और अपनी मांगों के समर्थन में देश भर में विरोध-प्रदर्शन कर रही है। हम छात्र बस यही चाहते हैं कि जान गंवाने की घटनाओं के लिए कुछ जवाबदेही तय हो। उन्होंने आगे कहा कि नेतृत्व को जवाबदेह ठहराना ‘लाखों छात्रों और अभिभावकों का हमारी शिक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है’ और ऐसा न करने से अनजाने में यह संदेश जाता है कि प्रशासन मौजूदा स्थिति को ही स्वीकार करता है। इसलिए, हम आपसे सम्मानपूर्वक अनुरोध करते हैं कि आप शिक्षा मंत्री को उनके पद से हटा दें। वे आपकी मर्ज़ी से काम कर रहे हैं और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है।
‘मंत्री को हटाने से सरकार की छवी बेहतर होगी’
दीपके ने तर्क दिया कि शिक्षा मंत्री को हटाने से सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि जवाबदेही के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दिखेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्रों और अभिभावकों में निराशा और बढ़ सकती है। छात्रों की मानसिक सेहत और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही, ढांचागत सुधार किए जाने चाहिए ताकि ‘यह पक्का किया जा सके कि पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी निराशा के कारण और युवाओं की जान न जाए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अपनी मांग रखने के लिए पूरे भारत से छात्र 20 जून से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आपकी सरकार भारत के भविष्य की आवाज सुनेगी।’
20 जून को दूसरा बड़ा जमावड़ा
बता दें कि बीते 6 जून को दीपके के बुलावे पर सैकड़ों छात्र और युवा पेशेवर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर इकट्ठा हुए थे। उन्होंने परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। इस प्रदर्शन के बाद, संगठन ने परीक्षाओं से जुड़े विवादों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर कई शहरों में अपना अभियान बढ़ाया। इस दौरान प्रधान का इस्तीफा उनकी मुख्य मांग बनी रही।