प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां पर एक युवक का शव गांव के पास अधजला मिला है। परिजनों ने गेहूं के बोझ में जिंदा जलाने का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गयी है। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी हुई है। वहीं, इस घटना पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि, बाबासाहेब की जयंती के पहले ऐसी घटना को अंजाम देकर कुछ शक्तिशाली लोग अपनी ताक़त का जो संदेश समाज को देना चाहते हैं, वो लोग एक बीमार सोच से ग्रसित नकारात्मक और अत्याचारी लोग हैं।
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पूरा मामला करछना थाना अंतर्गत भुंडा चौकी क्षेत्र के इसौटा गांव का है। जहां रविवार की सुबह गांव के बाहर बगीचे में ग्रामीणों ने एक अधजला शव देखा। गांव के ही अशोक कुमार ने मृतक की पहचान बेटे देवी शंकर (30) के रूप में की है। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की। उधर ग्रामीणों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। पुलिस ने किसी तरह से समझा बुझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया है। मृतक के पिता अशोक कुमार की तहरीर पर गांव के ही लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू कर दी है।
प्रयागराज में एक प्रभुत्ववादी द्वारा दलित समाज के एक युवक को जिंदा जलाकर मारने का जो जघन्य अपराध हुआ है, उसने साबित कर दिया है कि सत्ता का अपने लोगों को दिया अवांछित प्रश्रय और अहंकार अब सरेआम हत्यारे तक करवा रहा है। बाबासाहेब की जयंती के पहले ऐसी घटना को अंजाम देकर कुछ शक्तिशाली… pic.twitter.com/p1Xmunu3MV
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 13, 2025
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वहीं, इस घटना पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि, प्रयागराज में एक प्रभुत्ववादी द्वारा दलित समाज के एक युवक को जिंदा जलाकर मारने का जो जघन्य अपराध हुआ है, उसने साबित कर दिया है कि सत्ता का अपने लोगों को दिया अवांछित प्रश्रय और अहंकार अब सरेआम हत्यारे तक करवा रहा है। बाबासाहेब की जयंती के पहले ऐसी घटना को अंजाम देकर कुछ शक्तिशाली लोग अपनी ताक़त का जो संदेश समाज को देना चाहते हैं, वो लोग एक बीमार सोच से ग्रसित नकारात्मक और अत्याचारी लोग हैं। देखते हैं इन दबंग आपराधिक तत्वों के घर पर बुलडोज़र भेजने का नैतिक बल और ऊर्जा किसी में शेष बची है या फिर वो अपराधियों के सामने सरेंडर करके, ठंडे पड़ गये हैं। अगर ‘निंदनीय’ से भी निम्नतर कोई शब्द हो सकता है तो उसे इस कुकृत्य की निंदा के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।