लखनऊ। यूपी की 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए इस भर्ती की पूरी मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने तीन महीने के अंदर नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट के इस फैसले पर विपक्षी दल के नेता भाजपा सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। वहीं, अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
पढ़ें :- 'सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं', कलकत्ता हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, ”शिक्षकों की भर्ती में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला सामाजिक न्याय की दिशा में स्वागत योग्य कदम है। यह उन पिछड़ा व दलित वर्ग के पात्रों की जीत है जिन्होंने अपने अधिकार के लिए लंबा संघर्ष किया। उनका मैं तहेदिल से स्वागत करता हूं।”
शिक्षकों की भर्ती में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला सामाजिक न्याय की दिशा में स्वागत योग्य कदम है। यह उन पिछड़ा व दलित वर्ग के पात्रों की जीत है जिन्होंने अपने अधिकार के लिए लंबा संघर्ष किया। उनका मैं तहेदिल से स्वागत करता हूं।
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) August 17, 2024
पढ़ें :- UP Board Exam 2026 : यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर पुष्पवर्षा व टीका लगाकर परीक्षार्थियों किया गया स्वागत
वहीं, कोर्ट का फैसला आने के बाद विपक्षी दल भाजपा सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। मायावती ने सोशल मीडिया लिखा कि, यूपी में सन 2019 में चयनित 69,000 शिक्षक अभ्यार्थियों की चयन सूची को रद्द करके तीन महीने के अन्दर नई सूची बनाने के हाईकोर्ट के फैसले से साबित है कि सरकार ने अपना काम निष्पक्षता व ईमानदारी से नहीं किया है। इस मामले में खासकर आरक्षण वर्ग के पीड़ितों को न्याय मिलना सुनिश्चित हो।