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अनुराग कश्यप के पोस्ट ने भारतीय सिनेमा में जाति और सेंसरशिप पर छेड़ी दी नई बहस, बोले-मोदी जी के हिसाब से भारत में नहीं है कास्ट सिस्टम?

By संतोष सिंह 
Updated Date

Anurag Kashyap On Phule Controversy : बॉलीवुड एक्टर प्रतीक गांधी (Bollywood actor Pratik Gandhi) और पत्रलेखा (Patralekha) की अपकमिंग फिल्म ‘फुले’ पहले 11 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन विवादों और सेंसर बोर्ड (Censor Board) की आपत्तियों की वजह से अब इसे 25 अप्रैल तक टाल दिया गया है। इस बीच फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने CBFC पर जमकर नाराजगी जताई है। साथ ही जातिवाद पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।

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अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap)  ने एक लंबा चौड़ा पोस्ट इंस्टाग्राम पर शेयर कर लिखा-धड़क 2 की स्क्रीनिंग के वक्त CBFC ने कहा कि मोदी जी ने देश में कास्ट सिस्टम खत्म कर दिया है। इसी आधार पर ‘संतोष’ फिल्म भी भारत में रिलीज नहीं हुई। अब ‘फुले’ पर ब्राह्मणों को आपत्ति है। जब जातिवाद ही नहीं है तो ब्राह्मण (Brahmin) को क्यों परेशानी हो रही है?

उन्होंने आगे लिखा कि आपकी क्यों सुलग रही है। जब कास्ट सिस्टम (Caste System) था नहीं तो ज्योतिबा फुले (Jyotiba Phule) और सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) क्यों थे? या तो आपका ब्राह्मणवाद (Brahminism) अस्तित्व में  ही नहीं है, क्योंकि मोदी जी जिनके हिसाब से भारत में कास्ट सिस्टम (Caste System in India) नहीं है? उन्होंने और भी बहुत कुछ लिखा है।

 आप भी देखिए ये पोस्ट:

सोशल मीडिया पर लोग दे रहे प्रतिक्रिया

अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग CBFC के रुख को संवेदनशील विषयों से बचने की कोशिश मान रहे हैं, तो कुछ इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सेंसरशिप बता रहे हैं। वहीं कुछ सच्चाई का साथ देने के लिए अनुराग को सलाम करते दिखे।

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CBFC ने ‘फुले’ फिल्म से क्या हटवाया?


CBFC ने ‘फुले’ फिल्म को ‘U’ सर्टिफिकेट तो दे दिया है, लेकिन साथ में कुछ शब्दों को हटाने के निर्देश दिए, जैसे ‘पेशवाई’, ‘मांग’, ‘महार’ आदि। फिल्म के निर्देशक अनंत महादेवन (Film director Anant Mahadevan) ने कहा कि उन्होंने सेंसर बोर्ड (Censor Board)  के सभी निर्देशों का पालन किया है।

जानें फुले फिल्म की कहानी

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‘फुले’ फिल्म भारतीय समाज सुधारकों ज्योतिबा फुले (Indian social reformer Jyotiba Phule) और सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) के जीवन पर आधारित है। ये फिल्म जातिवाद, शिक्षा और सामाजिक सुधार जैसे मुद्दों को उठाती है, जो भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं।

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