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चारबाग में आशा वर्कर्स ने किया प्रदर्शन,बोलीं- नहीं डरेंगे घुड़की से, खींच लेंगे कुर्सी से , अखिलेश ने वीडियो शेयर कर योगी सरकार को घेरा

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को चारबाग रेलवे स्टेशन पर आशा वर्कर्स ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन से सम्बद्ध आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन के बैनर तले प्रदेश भर से आशा वर्कर्स पहुंचीं। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। आशा वर्कर्स का कहना है कि 5 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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भीषण ठंड में यूपी के 75 जनपदों से आईं आशा वर्कर्स चारबाग रेलवे स्टेशन पर जुटी। वे स्टेशन से पैदल विधानसभा की ओर कूच करने वाली थीं। इससे पहले ही पुलिस पहुंच गई। 4 थानों की फोर्स ने सभी आशा वर्कर्स को चौतरफा बैरिकेडिंग करके रोक लिया।

चारबाग से निकलने के लिए आशा वर्कर से काफी संघर्ष और हंगामा किया, मगर पुलिस ने किसी भी आशा वर्कर को आगे नहीं बढ़ने दिया। इस दौरान आशा वर्कर्स ने नारा लगाया- 2 हजार में दम नहीं, 20 हजार से कम नहीं। फिलहाल सभी आशा वर्कर्स चारबाग रेलवे स्टेशन पर बैठी हैं। लगातार नारेबाजी कर रही हैं।

आशा वर्कर्स की 5 सूत्रीय मांग

1- आशा वर्कर्स को 45/46 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप राज्य स्वास्थ्यकर्मी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, ईएसआई, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन गारंटी दी जाए।

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2- 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा गारंटी दी जाए।

3- आशा वर्कर्स के काम के घंटे तय किए जाएं।

4- 2017 से अब तक के लम्बित भुगतानों का आकलन कर उसका भुगतान किया जाए।

5- सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए।

आशा वर्कर नीतू दीक्षित ने कहा कि 2006 से सेवा दे रही हूं। इस भीषण ठंड में आना हमारी मजबूरी है। हम लोग पहले से ही सड़कों पर हैं। अब यहां पहुंचकर अपने अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। गुहार लगा रहे हैं। 2000 रुपए वेतन मिलता है, जिसमें अपने बच्चों का लालन-पालन करना बेहद मुश्किल हो गया है। ना तो बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं और ना ही बीमार होने पर समय पर इलाज करवा पाते हैं।

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दूसरे बच्चों की जिंदगी बनाने वाले हम लोग अपने बच्चों का जीवन नहीं सुधर सकते हैं। 2000  रुपए जो हमको मिलते हैं, इसमें कोई अधिकारी कर्मचारी गुजारा करके दिखाएं। हमारे दो बच्चे हैं। ठीक से उनकी पढ़ाई नहीं हो पाई। आज वह नौकरी के लिए भटक रहे हैं। हमारे इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं है हम लोगों का आयुष्मान कार्ड से भी इलाज नहीं हो पा रहा। हम सब का इलाज करते हैं, मगर अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं।

आशा वर्कर का कहना है कि लखनऊ में प्रदर्शन करना हमारी मजबूरी है। सरकार कहती है, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मगर हमारी कोई मदद नहीं करती है। 2000 रुपए में हम क्या करें? हम लोग आशा वर्कर के रूप में भर्ती हुए थे। हमें ऑपरेटर बना दिया गया। कोरोना काल में हमने जान लगाकर काम किया।

कितनी आशाओं की मौत हो गई, मगर सेवा का सारा क्रेडिट मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को दे दिया। देर रात अगर हम लोग डिलीवरी के लिए सीएससी सेंटर पहुंचते हैं, तो हमको रात गुजारने के लिए एक कमरा तक नहीं मिलता है। दो से ढाई हजार रुपए हमको मिलता है, मगर वह भी समय से नहीं।

अगर हमें काम के हिसाब से पैसा मिलने लगे तो 15 से 20 हजार रुपए मिलेगा। हमको विधानसभा जाने से कोई रोक नहीं सकता। आज हम बैरिकेडिंग तोड़कर विधानसभा तक पहुंचेंगे।

अखिलेश यादव बोले – अब ‘आशा’ के हिस्से आई निराशा…

समाजवादी पार्टी  के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक पोस्ट पर वीडियो शेयर कर लिखा कि अब मुख्यमंत्री महोदय कहेंगे, कहीं भी ‘आशा वर्कर्स’ का कोई भी आंदोलन नहीं हुआ है। फिर अपनी एआई टीम से कहेंगे कि उनके ख़िलाफ़ ‘हाथ उठा-उठाकर’ जो नारे लग रहे हैं उसकी साउंड को बदलकर उनके जयकारे में बदल दो।

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