Ashad amavasya 2025 : हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष फल माना जाता है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ की आत्मा को शांति मिलती है और वो प्रसन्न होते है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या और शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या शनि अमावस्या कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं, इस साल कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि कब है और क्या उपाय करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
पढ़ें :- Mohini Ekadashi 2026 : मोहिनी एकादशी इस दिन मनाई जाएगी ? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 17 जून 2023 को सुबह 9 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 18 जून 2023 को सुबह 10 बजकर 8 मिनट पर होगा।
आषाढ़ी अमावस्या पर करें ये काम
पीपल के पेड़ की पूजा: आषाढ़ अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और जल चढ़ाने से पितर प्रसन्न होते हैं।
पशु-पक्षियों को भोजन: आषाढ़ अमावस्या पर गाय, कुत्ते, कौवे, और चींटियों को भोजन कराने से भी पितृ दोष दूर होता है।
पितृ दोष निवारण यज्ञ: अगर पितृ दोष बहुत ज्यादा है, तो किसी योग्य पंडित से पितृ दोष निवारण यज्ञ करवाना चाहिए।
पढ़ें :- Sita Navami 2026 : सीता नवमी पर व्रत करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है,जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
पितृ दोष के लिए दान: आषाढ़ अमावस्या के दिन अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार पितरों के नाम पर धन का दान करना चाहिए।