Ayodhya Deepotsav 2026: दीपोत्सव के मौके पर अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से अयोध्या की भव्यता और त्रेतायुग की स्मृतियों का स्मरण करते हुए कहा कि आज की अयोध्या उसी त्रेतायुग की याद दिलाती है, जब 14 वर्ष का वनवास पूरा कर प्रभु श्रीराम, माता जानकी, अनुज लक्ष्मण और पवनसुत हनुमान के साथ अयोध्या लौटे थे।
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उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई ‘अवधपुरी अति रुचिर बनाई, देवन्ह सुमन बृष्टि नभ लाई’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अयोध्या में बिल्कुल वैसा ही अलौकिक दृश्य दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से रामलला के विराजमान होने के समय भी आसमान से पुष्पवर्षा का ऐसा ही दिव्य दृश्य देखने को मिला था।
अखिलेश यादव पर हमला
सीएम योगी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर हमला करते हुए कहा कि सुनने में आया है कि कुछ लोग अयोध्या आना चाहते हैं। लेकिन अयोध्या आने से पहले वह साधु संतों से माफी मांग लें। यह वही लोग हैं जिन्होंने कारसेवकों पर गोली चलावाई थीं।
अयोध्या में अब न कभी कर्फ्यू लगेगा, और न कोई दंगा करने का साहस कर पाएगा
कड़े तेवर और स्पष्ट संदेश देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि अब अयोध्या कभी कर्फ्यू के दायरे में नहीं आएगी। यहाँ कोई भी असामाजिक तत्व दंगा-फसाद करने का दुस्साहस नहीं कर सकेगा। अयोध्या को अब कोई उपेक्षित नहीं कर सकता और न ही यहाँ के संतों का अपमान करने या रामभक्तों पर गोली चलाने का पुराना दौर दोबारा लौट सकता है। उन्होंने कहा कि इसी संकल्प और संदेश को दोहराने के लिए वे आज दीपोत्सव के मंच पर उपस्थित हैं।
25 हजार दीपों से शुरू हुआ दीपोत्सव 30 लाख तक पहुंचा
दीपोत्सव की ऐतिहासिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने बताया कि मात्र 25 हजार दीपों से शुरू हुआ यह पावन आयोजन आज 25 लाख की सीमा पार कर चुका है। महामहिम राष्ट्रपति के करकमलों से दीप प्रज्वलन के पश्चात अयोध्या धाम में कुल 30 लाख दीप प्रज्वलित किए गए हैं, जो पूरी दुनिया को भगवान राम के प्रकाश से आलोकित कर रहे हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति की व्यस्तताओं के बावजूद दीपोत्सव-2026 में सहभागिता करने पर उनका आभार व्यक्त किया। साथ ही, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, पूज्य संतों और अन्य विशिष्ट अतिथियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।
प्रभु श्रीराम भारत राष्ट्र के प्राण और आत्मसम्मान हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या की यह पावन शक्ति और श्रीराम की चेतना ही वास्तव में भारत की असली चेतना है। यही हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। प्रभु श्रीराम केवल हमारी आस्था ही नहीं, बल्कि भारत राष्ट्र के प्राण और हर भारतीय का सर्वोच्च आत्मसम्मान हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे प्रभु के नाम का स्मरण करते हुए ‘रामराज्य’ की अवधारणा को वास्तविक रूप से साकार करने में अपना योगदान दें।