लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा, यूपी ‘विकसित भारत’ के साथ ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के साथ ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के लक्ष्य को प्राप्त करेगा। मुख्यमंत्री ने कृषि, एमएसएमई, स्वरोजगार एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े प्राथमिक क्षेत्रों में संस्थागत ऋण प्रवाह को सुदृढ़ कर आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई।
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इस दौरान उन्होंने कहा, आज भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपने आप को स्थापित कर रहा है। पहली बार देश के अंदर कोऑपरेटिव एक मंत्रालय के रूप में कार्य कर रहा है। एफपीओस को हर एक स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है। इस बार के केंद्रीय बजट में ‘लखपति दीदी’ को ‘शी-मार्ट’ से जोड़कर सशक्त बनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए ‘शी-मार्ट’ की स्थापना की जाएगी। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा यूनियन बजट में की गई है।
इसके साथ ही कहा, 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति क्या थी? न विकास था, न रोजगार। सहकारिता क्षेत्र में ऐसे लोग हावी थे, जो प्रदेश के सबसे बड़े माफिया थे। 16 जिला सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक ने डिफॉल्टर घोषित कर दिया था। आज इन 16 में से 15 बैंक प्रॉफिट में आ चुके हैं और 16वें को भी प्रॉफिट में लाने की प्रक्रिया जारी है। उत्तर प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर की स्थिति पहले बेहद खराब थी। लोग पलायन कर चुके थे, हस्तशिल्पी निराश और कारीगर हताश थे। एमएसएमई सेक्टर बंदी के कगार पर था। सरकार ने इसे ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट’ के रूप में प्रोत्साहित किया। आज इसके परिणाम हम सबके सामने हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, आज उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जो अपने यहां एमएसएमई सेक्टर को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर देता है। वर्तमान में 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स उत्तर प्रदेश में कार्य कर रही हैं और लगभग 3 करोड़ परिवार अपनी आजीविका के लिए इसी सेक्टर पर निर्भर हैं। आज पूरे देश में ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ एक सशक्त ब्रांड के रूप में स्थापित हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जब भी विश्व के किसी देश की यात्रा पर जाते हैं, तो एमएसएमई से जुड़े ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ के उत्पादों को राष्ट्राध्यक्षों को उपहार स्वरूप भेंट करते हैं।