Benefits of catechu: उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर खाने के बाद पान खाना पसंद किया जाता है। पान खाने में टेस्टी तो होता ही यह बेहतरीन होता ही है सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। पान के साथ साथ इस पर लगने वाला कत्था भी फायदेमंद है। कत्था (catechu) एक प्रकार के पेड़ की लकड़ी से निकाला जाता है। जिसकी तासीर ठंडी होती है लेकिन खाने में इसका स्वाद कसैला होता है। आयुर्वेद में कत्थे को कई औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है।
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क्या आप जानते है कत्था (catechu) का सीमित मात्रा में सेवन करने से सर्दी जुकाम और खांसी की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। खांसी को ठीक करने के लिए कत्थे और हल्दी और मिश्री के साथ मिलाकर उसके मिश्रण से गोलियां तैयार कर लें। अब इन गोलियों को मुंह में रखकर चूसने से खांसी में आराम मिल सकती है। कत्था (catechu) पाचन से संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। कत्थे को पानी में उबालकर पीने से दस्त, खट्टी डकार और पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
कत्थे (catechu) में एंटी बैक्टीरियल गुण मुंह के छालों के इंफेक्शन को कम करने में मदद करते है। कत्थे का कसैला गुण मुंह के छालों को कम करने में मदद कर सकता है। कत्थे का पेस्ट लगाने से मुंह के छाले, मसूड़े में सूजन और कटने जैसी समस्याओं से आराममिलता है।
अगर मुंह के छालों से अक्सर परेशान रहते है तो कत्थे (catechu) के एक छोटे से टुकड़े को पानी में भिगो दें। जब कत्था पानी में फूल जाए तो इसे चम्मच की मदद से अच्छी तरह मिलाते हुए इसका पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को छालों पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। फिर मुंह की लार गिरा दें। ऐसा दिन में दो से तीन बार करने से मुंह के छालों में राहत मिलती है।
अगर किसी के दांतों में पायरिया और मुंह से बद्बू आती रहती हो तो कत्थे (catechu) को सरसों के तेल में मिलाकर डेली दिन में तीन बार मसूड़ों की मालिश करने से मसूड़ों से खून खून आने की समस्या से छुटकारा मिलता है और मुंह से आने वाली बद्बू कम कम होती है। इतना ही नहीं अगर चोट या घाव हो तो कत्थे को पीसकर लगाने से घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है।