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बिहार BJP कोर कमेटी की बैठक रद्द, सूबे का अगला मुख्यमंत्री कौन फंसा बड़ा पेच ? अब केन्द्रीय पर्यवेक्षक सुलझाएंगे मामला

By संतोष सिंह 
Updated Date

पटना। दिल्ली में बिहार भाजपा की कोर कमेटी शनिवार को होने वाली बैठक अंतिम क्षणों में रद्द कर दी गयी, जबकि इस बैठक में शामिल होने के लिए बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा) और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरवागी विशेष तौर पर दिल्ली पहुंचे थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विजय कुमार चौधरी भी दिल्ली में ही थे। सारी परिस्थितियां बिहार के नये सीएम पर चर्चा के अनुकूल थीं, लेकिन जब बैठक आखिरी वक्त में कैंसल कर दी गयी तो सवाल उठने लगे? क्या भाजपा के सीएम को लेकर कोई पेच फंस गया? क्या नीतीश नाखुश हो गये हैं ? क्या भाजपा के अंदर कोई उठापटक शुरू हो गयी है?

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नाम पर आम सहमति नहीं होने क्या बैठक हुई रद्द?

पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के भावी सीएम के रूप में जिस नेता का नाम (सम्राट चौधरी) सबसे अधिक चर्चा में हैं, उन पर पार्टी में एक राय नहीं है। राष्ट्रीय स्तर के कुछ वरिष्ठ नेता इस नाम पर सहमत नहीं हैं। जब पार्टी में सर्वमान्य राय बनती नहीं दिखी तो बैठक को रद्द करना ही ठीक समझा गया। लेकिन इस सच पर पर्दा डालने के लिए बंगाल चुनाव की व्यस्तता का हवाला दे दिया गया। जब भाजपा में सत्ता के सुचारू हस्तांतरण पर गतिरोध उत्पन्न हो गया तो नीतीश कुमार भी नाखुश बताये जा रहे हैं। भाजपा की बैठक रद्द होने से इस पूरे प्रकरण में गलत संदेश गया है। सवाल पूछा जा रहा है कि क्या भाजपा के कॉन्फिडेंस में कमी दिख रही है?

बता दें कि बीते 10 अप्रैल को जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली तब तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन इसके बाद जरूर कुछ ऐसा हुआ कि जिससे बैठक रद्द करनी पड़ी। जाहिर है अगर बिहार के भावी सीएम पर भाजपा को चर्चा नहीं करनी होती तो वह दोनों उप मुख्यमंत्रियों और प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली नहीं बुलाती। अगर बंगाल चुनाव को लेकर ऐसी कोई इमरजेंसी रहती तो वह 10 अप्रैल की सुबह ही बिहार के नेताओं को पटना लौटने के लिए कह देती, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बिहार भाजपा कोर कमेटी की बैठक का आखिरी वक्त तक इंतजार हुआ और फिर अचानक उसे कैंसिल कर दिया गया?

अब पर्यवेक्षक सुलझाएंगे मामला!

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पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भावी सीएम पर चर्चा के लिए एक केन्द्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति करेगी। यह मसला भाजपा के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। बिहार का नया सीएम चुनने के आखिरी वक्त में उसका आत्मविश्वास बिखर रहा है। माना जाता है कि जब पार्टी में खींचतान रहती है तभी पर्यवेक्षक के जरिये समस्या का हल निकाला जाता है। पर्यवेक्षक बिहार भाजपा के नेताओं के सीधे बात कर पार्टी के सामने अपनी राय रखेंगे। इसके बाद पटना में विधायक दल की बैठक बुलायी जाएगी। भाजपा नीतीश कुमार को लेकर जरूरत से अधिक सतर्क है। जदयू के समर्थकों कहीं यह न सोचने लगें कि नीतीश के चेहरे पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने उन्हें दरकिनार कर दिया, इस आरोप से बचने के लिए वह फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। अब सबकी नजरें एनडीए की आगामी बैठक और शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। जब तक नया नाम सामने नहीं आता. तब तक बिहार की सियासत में यह सवाल बना रहेगा कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा।

चिराग पासवान ने खुद को सीएम की रेस से बाहर किया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा में शपथ लेते ही अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सत्ता के गलियारों में कई नामों की चर्चा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी के नाम का एलान नहीं हुआ है। एनडीए खेमे के भीतर भी मंथन जारी है कि राज्य की कमान किस चेहरे को सौंपी जाए। इसी राजनीतिक सरगर्मी के बीच केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने साफ कर दिया है कि वे बिहार के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वे खुद को मुख्यमंत्री की रेस में नहीं देखते ऐसे में इस बयान के बाद उन अटकलों पर विराम लगता दिख रहा है जिनमें चिराग को संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जा रहा था।

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