नई दिल्ली। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) के तरफ से ओडिशा के पूर्व सीएम बीजू पटनायक (Former Odisha CM Biju Patnaik) को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब बीजू पटनायक (Biju Patnaik) के बेटे और ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक (Former Odisha CM Naveen Patnaik) ने भाजपा सांसद के बयान पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उनके बयान की कड़ी निंदा की। बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शायद टिप्पणी करने वाले सांसद को यह जानकारी नहीं है कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Prime Minister Jawaharlal Nehru) ने चीन के साथ संघर्ष के दौरान बीजू पटनायक (Biju Patnaik) को रणनीति बनाने में मदद के लिए दिल्ली में अपने कार्यालय के पास ही एक दफ्तर दिया था, जबकि वह ओडिशा के मुख्यमंत्री थे।
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बीजू पटनायक पर निशिकांत दुबे की विवादित टिप्पणी राजनीतिक रूप ले रही है।
बीजू पटनायक सम्मानित शख़्स रहे हैं।इन्हें व्हाट्सएप फॉरवर्ड ज्ञान से टारगेट नहीं कर सकते हैं।सेव कर लें-निशिकांत दुबे बीजेपी के “मणिशंकर अय्यर” बन रहे हैं
pic.twitter.com/kDGoRu6qBt— Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) March 30, 2026
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भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए नवीन पटनायक ने कहा कि बीजू बाबू के बारे में जो अपमानजनक बातें की गईं, उन्हें सुनकर मैं हैरान हूं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें ये पता है कि चीन के साथ लड़ाई के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बीजू पटनायक को रणनीति बनाने में मदद करने के लिए दिल्ली में अपने कार्यालय के पास ही एक दफ्तर दिया था, जबकि वे उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री थे।
उन्होंने कहा कि उस समय मैं लगभग 13 वर्ष का था, लेकिन मुझे अच्छी तरह याद है कि चीनी हमले को लेकर बीजू बाबू कितने गुस्से में थे। उसे रोकने के लिए उन्होंने कितने प्रयास किए थे। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान देने के लिए उन सांसद को किसी मनोचिकित्सक को दिखाने की जरूरत है।
बता दें कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) ने एक नया विवाद छेड़ते हुए ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक पर जवाहरलाल नेहरू और अमेरिका (CIA) के बीच मध्यस्थ होने का गंभीर आरोप लगाया था। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
क्या है निशिकांत दुबे का दावा?
दुबे का आरोप है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नेहरू ने अमेरिकी पैसे का इस्तेमाल किया था। उनका कहना है कि उस समय बीजू पटनायक भारत और अमेरिका के बीच कड़ी का काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने पत्रों के जरिए पटनायक को रक्षा मामलों पर अमेरिका से बातचीत के लिए भेजा था।
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कांग्रेस का काला अध्याय
11. अमेरिका की दलाल नेहरु-गांधी परिवार,आज ही के दिन यानि 27 मार्च 1963 को उड़ीसा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक जी अमेरिका पहुँचे थे ।1962 का चीन के साथ युद्ध हमने अमेरिका के कहने पर और अमेरिका के पैसे से लड़ा था ।दलाई लामा के भाई अमेरिका के साथ… pic.twitter.com/Xmh9lnCcAv— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) March 27, 2026
नंदा देवी में न्यूक्लियर डिवाइस का रहस्य भाजपा सांसद ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि अमेरिका और CIA के दबाव में नेहरू ने 1964 में उत्तराखंड की नंदा देवी पर्वत श्रृंखला में एक न्यूक्लियर डिवाइस (परमाणु उपकरण) लगाया था, जो आज भी लापता है। साथ ही, उन्होंने ओडिशा के चारबाटिया एयरबेस का उपयोग अमेरिकी जासूसी विमानों द्वारा किए जाने का भी आरोप लगाया है।
बीजेडी का तीखा पलटवार इन आरोपों से नाराज बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने इसे बीजू पटनायक का अपमान बताया है। पात्रा ने कहा कि दुबे इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं ताकि एक महान नेता को बदनाम किया जा सके। इसके विरोध में पात्रा ने निशिकांत दुबे के नेतृत्व वाली संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है।
कौन थे बीजू पटनायक?
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बीजू पटनायक केवल ओडिशा के मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी और कुशल पायलट भी थे। उन्होंने न केवल भारत की आजादी में योगदान दिया, बल्कि इंडोनेशिया को आजादी दिलाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ के लिए उड़ान भरने और इंडोनेशियाई नेताओं को बचाने के लिए जकार्ता तक विमान उड़ाने के उनके किस्से आज भी मशहूर हैं।
राजनीतिक विवाद क्यों?
यह विवाद नेहरू-गांधी परिवार और विपक्षी दलों के बीच चल रही वैचारिक लड़ाई का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ भाजपा इसे कांग्रेस का काला अध्याय बता रही है, तो दूसरी तरफ ओडिशा की क्षेत्रीय राजनीति में बीजू पटनायक का नाम एक भावनात्मक मुद्दा है, जिसे लेकर बीजेडी कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं है।