Black Gram Mixed With Wheat Flour : गेहूं पिसवाते समय उसमें कला चना मिलाकर पिसवाने से यह एक अत्यंत पौष्टिक, प्रोटीन से भरपूर और रेशेदार आटा बनता है जो पारंपरिक आहार को और भी पौष्टिक बनाता है। ऐसा करने से गेहूं की गुणवत्ता बढ़ जाती है। गेहूं में थोड़ा काला चना मिलाने की परंपरा कोई नया ट्रेंड नहीं बल्कि पुराना देसी नुस्खा है, इसके कई चौंकाने वाले फायदे होते हैं। काला चना प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और पोटेशियम से भरपूर होता है, जो गेहूं में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के पूरक के रूप में काम करता है और निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।
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क्रेविंग्स पर कंट्रोल
इस आटे में मौजूद उच्च फाइबर सामग्री वजन को नियंत्रित करने और पाचन में सुधार करने में मदद करती है। इस देसी आटे से बनी रोटियां खाने से बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है, क्योंकि काले चने में मौजूद फाइबर डाइजेशन को स्लो करता है और क्रेविंग्स पर कंट्रोल करता है।
मिश्रण की गुणवत्ता
इसमें चने की उपस्थिति के कारण, यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता, जो इसे मधुमेह रोगियों के लिए एक बेहतर विकल्प बनाता है।
बेकिंग और पकाने में गुणवत्ता: 10-20% चने का आटा मिलाने से बनावट अच्छी रहती है और ग्लूटेन कम होने से पाचन में आसानी होती है। 20% से अधिक मिलाने पर रोटी का स्वाद और बनावट बदल सकती है, लेकिन पोषक तत्व बढ़ जाते हैं।