नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) बुधवार को देश की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गई हैं। बता दें कि वह वकील के तौर पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है, क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनाव आयोग (Election Commission) की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है।
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मंगलवार को ही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन।
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है।
ममता बनर्जी की दलील- जिनके नाम कटे, उन्हें सुनवाई का मौका मिले
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की चुनाव आयोग (Election Commission) में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission) को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।