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Delhi Liquor Scam : दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व सांसद के. कविता बरी, कोर्ट के फैसले पर कहा- ‘सत्यमेव जयते’

दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy) से जुड़े कथित घोटाले में तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी के. कविता (Daughter K. Kavitha) को दिल्ली की एक अदालत ने बरी कर दिया। तेलंगाना जागृति की संस्थापक के. कविता (Telangana Jagruthi founder K. Kavitha) ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए 'सत्यमेव जयते' (सत्य की जीत होती है) की बात कही है। कविता ने दावा किया कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उन्हें फंसाने की एक साजिश थी।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy) से जुड़े कथित घोटाले में तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी के. कविता (Daughter K. Kavitha) को दिल्ली की एक अदालत ने बरी कर दिया। तेलंगाना जागृति की संस्थापक के. कविता (Telangana Jagruthi founder K. Kavitha) ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘सत्यमेव जयते’ (सत्य की जीत होती है) की बात कही है। कविता ने दावा किया कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उन्हें फंसाने की एक साजिश थी।

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के कविता ने हैदराबाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy)  मामले में झूठ के जाल को काटा है। यह मामला तब चर्चा में आया जब कविता को मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से जमानत मिलने के बाद उन्हें अगस्त 2024 को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था।

केजरीवाल-सिसोदिया भी हुए बरी

इस फैसले से के. कविता (K. Kavitha) को व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से एक बड़ी राहत मिली है। यह मामला फिलहाल कानूनी रूप से समाप्त होता दिख रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है। गौरतलब है कि इस मामले में कविता के साथ ही आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल (AAP convener Arvind Kejriwal) और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Former Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia) को भी बरी कर दिया गया है।

दिल्ली की नई शराब नीति क्या थी?

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17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और इनमें कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा।

सरकार ने लाइसेंस की फीस भी कई गुना बढ़ा दी। जिस एल-1 लाइसेंस के लिए पहले ठेकेदारों को 25 लाख देना पड़ता था, नई शराब नीति लागू होने के बाद उसके लिए ठेकेदारों को पांच करोड़ रुपये चुकाने पड़े। इसी तरह अन्य कैटेगिरी में भी लाइसेंस की फीस में काफी बढ़ोतरी हुई।

घोटाले के आरोप क्यों लगे?

नई शराब नीति (New Liquor Policy) से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप लगे। वहीं, बड़े शराब कारोबारियों को फायदा होने की बात कही थी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) का यही आरोप था। तीन तरह से घोटाले की बात कही गई।

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