Hindenburg Report: हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। विपक्षी दल इस रिपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। अब बसपा सुप्रीमो मायावती का बयान आया है। उन्होंने इस मामले में जेपीसी या जुडिशियल जांच की मांग उठाई है।
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मायावती (Mayawati) ने एक्स पर लिखा कि, पहले अडानी ग्रुप व अब सेबी चीफ सम्बंधी हिण्डनबर्ग की रिपोर्ट फिर से जबरदस्त चर्चाओं में है तथा आरोप-प्रत्यारोप का दौर इस हद तक जारी है कि इसे देशहित को प्रभावित करने वाला बताया जा रहा है। अडानी व सेबी द्वारा सफाई देने के बावजूद मुद्दा थमने का नाम नहीं ले रहा बल्कि उबाल पर है।
1. पहले अदाणी ग्रुप व अब सेबी चीफ सम्बंधी हिण्डनबर्ग की रिपोर्ट फिर से जबरदस्त चर्चाओं में है तथा आरोप-प्रत्यारोप का दौर इस हद तक जारी है कि इसे देशहित को प्रभावित करने वाला बताया जा रहा है। अदाणी व सेबी द्वारा सफाई देने के बावजूद मुद्दा थमने का नाम नहीं ले रहा बल्कि उबाल पर है।
— Mayawati (@Mayawati) August 13, 2024
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उन्होंने कहा कि, वैसे यह मुद्दा अब सत्ता व विपक्ष के वाद-विवाद से परे केन्द्र की अपनी साख व विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर रहा है, जबकि केन्द्र सरकार को अब तक इसकी उच्च-स्तरीय जांच अर्थात् जेपीसी या जुडिशियल जांच जरूर बैठा देनी चाहिये थी तो यह बेहतर होता।
बता दें कि, अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर एक बार फिर देश में बवाल मचा हुआ है। अमेरिकी शॉर्ट सेलर ने नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच पर उन ऑफशोर फंड्स में निवेश करने का आरोप लगाया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अडानी समूह के शेयरों में तेजी लाने के लिए किया गया था। हालांकि, बुच दंपती ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि सभी निवेश की जानकारी का खुलासा नियमों के अनुसार किया गया है।