Tahawwur Rana extradition: मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में से एक तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का श्रेय लेने के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच होड मच गयी है। एकतरफ भाजपा के नेता इसे मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि राणा का प्रत्यर्पण इसलिए हो पाया क्योंकि यूपीए की सरकार ने सही समय पर जांच शुरू कर दी थी।
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दरअसल, पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा ने प्रत्यर्पण से बचने में अमेरिका की सभी अदालतों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसकी सभी दलीलें खारिज कर दी गईं। वहीं, 8 अप्रैल 2025 को अमेरिकी अधिकारियों ने तहव्वुर राणा को भारतीय अधिकारियों को सौंपा। इसके बाद उसे 10 अप्रैल को नई दिल्ली लाया गया। जिसके बाद राणा एनआईए की हिरासत में है, अब उससे सुरक्षा एजेंसियां 26/11 आतंकी हमले से जुड़े सभी राज उगलवाएंगी।
हालांकि, राणा के प्रत्यर्पण का श्रेय लेने के लिए भाजपा और कांग्रेस में जुबानी जंग छिड़ गयी है। इसी कड़ी में मध्य-प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को इसका श्रेय देने की आलोचना की है। एक समाचार एजेंसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ”26/11 के षड्यंत्र में शामिल था ये व्यक्ति (तहव्वुर राणा)। और इसका जो प्रत्यर्पण हुआ है, ये इसलिए हुआ है क्योंकि उस समय की यूपीए सरकार में सही समय पर जांच में उसका नाम पकड़ में आया। उसकी गिरफ्तारी हुई यूएसए में।”
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, “यूएसए में गिरफ्तारी के बाद उसे (तहव्वुर राणा) सजा हो गयी। सजा कटाने के बाद उसका भारत में प्रत्यर्पण हो गया, इसमें कोई श्रेय मोदी जी को नहीं जाता है।” भाजपा के प्रत्यर्पण में लचार रवैया अपनाने के आरोपों पर उन्होंने कहा, ‘भाजपा वाले झूठ बोलते हैं, राणा को अमेरिका में 14 साल की कैद हुई थी और जब तक सजा पूरी होती तब तक उसका प्रत्यर्पण हो नहीं सकता था। सजा पूरी हो गयी तो प्रत्यर्पण हो गया। इसकी शुरुआत कांग्रेस पार्टी ने ही की थी।”
इससे पहले कांग्रेस नेता और यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहे पी चिदंबरम ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का श्रेय लेने पर मोदी सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यूपीए सरकार ने इसकी जमीनी तैयारी की थी। चिदंबरम ने कहा कि फरवरी 2025 में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसका श्रेय लेने की कोशिश की जो मूलत: यूपीए सरकार के वर्षों के जमीनी काम का नतीजा है।