नई दिल्ली। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) ने 11 फरवरी को अपनी 180 देशों की करप्शन रिपोर्ट (Corruption Report) जारी की। भारत की रैंकिंग में गिरावट आई है। वह 2024 की लिस्ट में 3 पायदान गिरकर 96वें नंबर पर आ गया है। 2023 में भारत 93वें नंबर पर था। इसका मतलब हमारे भारत में करप्शन बढ़ा है।
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भारत में बढ़ा भ्रष्टाचार
भारत के पिछले 10 सालों का आंकड़ा देखे तो देश में भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी हुई है। 2014 में जहां भारत 85वें स्थान पर था, 10 सालों में भारत 11 पायदान गिरकर 96वें स्थान पर आ गया है। 2014 से 2024 के बीच भारत ने सबसे अच्छा प्रदर्शन 2015 में किया था जब देश को 76वां स्थान हासिल हुआ था। हालांकि, उसके बाद से भारत की रैंकिंग में लगातार गिरावट आई है जो दिखाता है कि भारत में भ्रष्टाचार बढ़ा है।
पड़ोसी देश चीन 76वें नंबर पर बरकरार है। उसकी रैंकिंग में 2 साल से बदलाव नहीं आया है। वहीं, पाकिस्तान में भी करप्शन बढ़ा है। वह 133 से 135वें नंबर पर आ गया है। श्रीलंका 121वें और बांग्लादेश 149वें नंबर पर है
डेनमार्क पहले नंबर पर बना हुआ है। वहां सबसे कम भ्रष्टाचार है। फिनलैंड दूसरे और सिंगापुर तीसरे नंबर पर है। जबकि साउथ सूडान (180) सबसे करप्ट देश है। जारी की गई रैंकिंग में 1 नंबर पर रहने वाले देश में कम भ्रष्टाचार है और 180वें नंबर पर रहने वाले देश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है।
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मंगलवार को जारी रिपोर्ट में भारत का स्कोर 38 निर्धारित किया गया है। 2023 में यह स्कोर 39 और 2022 में 40 था। सिर्फ एक नंबर के कम होने से भारत 3 पायदान खिसक गया है। वैश्विक औसत सालों से 43 बना हुआ है। जबकि दो-तिहाई से अधिक देशों ने 50 से नीचे स्कोर किया है।
इस इंडेक्स के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) के एक्सपर्ट्स हर देश के पब्लिक सेक्टर में भ्रष्टाचार का आकलन करते हैं। इसके बाद हर देश को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया जाता है। जिस देश में जितना ज्यादा भ्रष्टाचार, उसे उतना कम स्कोर दिया जाता है। इसी आधार पर इंडेक्स में रैंकिंग निर्धारित होती है।
दुनिया के सबसे भ्रष्ट देश कौन?
कुल वैश्विक आबादी (8 अरब) का 85 प्रतिशत यानी लगभग 6.8 अरब लोग ऐसे देशों में रहते हैं जिनका CPI स्कोर 50 से कम है। सबसे कम स्कोर वाले देश ज्यादातर वैसे देश हैं जो संघर्ष से जूझ रहे हैं।
इंडेक्स में सबसे भ्रष्ट दक्षिण सूडान को बताया गया है जो 8 अंकों के साथ सबसे निचले पायदान है। इसके बाद सोमालिया (9 अंक), वेनेजुएला (10 अंक), सीरिया (12 अंक), लीबिया (13 अंक), इरिट्रिया (13 अंक), यमन (13 अंक) और इक्वेटोरियल गिनी (13 अंक) हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार, टॉप स्कोर वाला क्षेत्र पश्चिमी यूरोप और यूरोपीय संघ था, लेकिन इन क्षेत्रों के स्कोर में लगातार दूसरे साल गिरावट देखी गई है जहां नेता लोगों की भलाई के बजाए व्यापारिक हितों के लिए काम कर रहे हैं। संस्था ने कहा कि यहां कानूनों का अक्सर खराब तरीके से पालन किया जाता है। इसमें कहा गया है, ‘हालांकि, एशिया प्रशांत क्षेत्र में कई देश सुधार कर रहे हैं, लेकिन इनका औसत स्कोर घट रहा है। इसकी वजह भ्रष्टाचार के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन भी है।
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भ्रष्टाचार जलवायु परिवर्तन के खिलाफ काम करने में बड़ी रुकावट
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) ने कहा कि भ्रष्टाचार दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ काम करने के रास्ते में बड़ी रुकावट बन रहा है। रिकॉर्ड तोड़ ग्लोबल वार्मिंग और अचानक मौसमी बदलावों, लोकतंत्र में गिरावट और वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन नेतृत्व में गिरावट आई है। इस परिदृश्य में दुनिया जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी लड़ाई को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। भ्रष्टाचार उस लड़ाई को और भी मुश्किल बना रहा है।